शिक्षण संस्थान इमारत से नहीं, शिक्षक और छात्रों से बनते हैं : अजय

 






रांची, 13 सितंबर (हि.स.)। रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में रविवार को पब्लिक स्कूल एंड चिल्ड्रेन एसोसिएशन (पासवा) की ओर से शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में शिक्षा, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और रोजगार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान करीब ढाई हजार शिक्षकों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षक सिर्फ छात्रों को पढ़ाते नहीं हैं, बल्कि उनके भविष्य और देश के अच्छे नागरिक के रूप में निर्माण करते हैं। कोई भी शिक्षण संस्थान केवल ईंट-पत्थर की इमारत से नहीं, बल्कि वहां के शिक्षक और छात्रों से बनता है। उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य की परंपरा सदियों पुरानी है। शिक्षकों का समाज को दिशा देने में हमेशा महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। गांवों में अभी कई चुनौतियां हैं, लेकिन मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के जरिए बेहतर शिक्षा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने एआई के इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि यह एक उपयोगी साधन है, लेकिन शिक्षक की जगह नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी की समस्याओं को समझना जरूरी है।

पासवा के मुख्य संरक्षक पूर्व मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि शिक्षक कुम्हार की तरह होते हैं, जो छात्रों के भविष्य को आकार देते हैं। उन्होंने शिक्षकों की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि पासवा अब शिक्षा के साथ छात्रों को स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाएगा।

डीजी रेल अनिल पालटा ने अपने स्कूली दिनों को याद करते हुए कहा कि शिक्षकों की डांट-फटकार भी छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए होती है। उन्होंने युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में पढ़े-लिखे युवा नौकरी की तलाश में हैं। उन्होंने छात्रों से अपील की कि परीक्षा में कम अंक आने पर निराश न हों। सफलता के लिए कई नए क्षेत्र और अवसर मौजूद हैं।

पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने कहा कि प्रत्येक वर्ष शिक्षकों को सम्मानित कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है और आने वाले समय में इस अभियान को और व्यापक बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों का सम्मान पूरे समाज का सम्मान है। निजी विद्यालयों के शिक्षक सीमित संसाधनों में भी बेहतर परिणाम देने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। उनके योगदान को उचित सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण मिलना चाहिए।

समारोह में रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ अजीत सिंह, रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिंह समेत कई गणमान्य मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे