नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत तमाम विपक्षी दलों ने की बजट की आलोचना
रांची, 24 फरवरी (हि.स.)। रांची, 24 फरवरी (हि.स.)। झारखंड विधानसभा में पेश किए गए राज्य बजट को लेकर विपक्षी नेताओं ने सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, विधायक सरयू राय और जेएलकेएम के विधायक जयराम महतो ने बजट को अव्यावहारिक, निराशाजनक और केवल कागजी घोषणाओं तक सीमित बताया है।
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर बजट राशि के प्रभावी उपयोग में विफल रहने का आरोप लगाया है।मंगलवार को विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ष बड़ा बजट पेश करती है, लेकिन उसे समय पर और प्रभावी तरीके से खर्च नहीं कर पाती। कई विभागों में आवंटित राशि लंबित रह जाती है, जिससे विकास कार्य अधूरे रह जाते हैं।
मरांडी ने कहा कि राज्य में आज भी लोग सड़क, नाली, पेयजल और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार आंकड़ों का खेल खेल रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अपनी प्रशासनिक कमजोरियों को छिपाने के लिए केंद्र सरकार पर दोष मढ़ती है।
सरयू राय ने बजट को बताया निराशाजनक
विधायक सरयू राय ने राज्य सरकार के बजट को निराशाजनक करार दिया। उन्होंने कहा कि इसमें कोई नई सोच या ठोस पहल नजर नहीं आती और यह मूल रूप से पिछले बजट की पुनरावृत्ति प्रतीत होता है।
विधानसभा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पुराने प्रावधानों को नए शब्दों में प्रस्तुत किया गया है, लेकिन इसमें दूरगामी और प्रभावी योजनाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि राज्य को ऐसे बजट की आवश्यकता है, जो वास्तविक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करे और आर्थिक अनुशासन के साथ विकास की स्पष्ट रूपरेखा दे।
सिर्फ कागजों में लोकलुभावन बजट : जयराम महतो
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के विधायक जयराम महतो ने भी बजट पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे कागजों पर लोकलुभावन बजट बताया। उन्होंने कहा कि बजट में आकर्षक घोषणाएं और बड़ी योजनाएं जरूर दिखाई देती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका असर नजर नहीं आता। पिछले वित्तीय वर्ष में आवंटित राशि का स्पष्ट और पारदर्शी ब्योरा तक उपलब्ध नहीं है।
जयराम महतो ने सवाल उठाया कि जब पूर्व स्वीकृत योजनाओं का सही आकलन और पारदर्शी हिसाब उपलब्ध नहीं है, तो नई घोषणाओं पर भरोसा कैसे किया जाए। उन्होंने सरकार से पिछले बजट की राशि के खर्च का श्वेत पत्र जारी करने की मांग की, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे