दसलक्षण महापर्व पर जैन मंदिर में भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु
रामगढ़, 16 सितंबर (हि.स.)। क्रोध पर क्षमा, वैर पर मैत्री और कटुता पर करुणा की विजय का संदेश देते हुए बुधवार को दसलक्षण महापर्व का शुभारंभ उत्तम क्षमा धर्म की आराधना के साथ हुआ। रामगढ़ शहर के दिगंबर जैन मंदिर एवं रांची रोड स्थित पार्श्वनाथ जिनालय में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना, अभिषेक और शांतिधारा से दोनों जिनालय भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहे।
श्री दिंगबर जैन मंदिर रामगढ़ में पाण्डुशिला पर विराजमान नमीनाथ भगवान की अष्टधातु प्रतिमा का कलशों से अभिषेक किया गया। अभिषेक का पुण्यार्जन हीरालाल जैन, किरण देवी, राजेंद्र जैन, प्रिया जैन एवं दिशा पाटनी परिवार ने किया, जबकि, शांतिधारा का पुण्यार्जन राजेंद्र जैन, राजेश जैन एवं प्रतीक चूड़ीवाल परिवार ने किया। मंदिर की तीनों वेदियों पर विराजमान बड़ी प्रतिमाओं का भी कलशाभिषेक हुआ।
चंद्रप्रभु भगवान की प्राचीन प्रतिमा के अभिषेक का पुण्यार्जन जीवन मल जैन, जंबू जैन, अभिजीत जैन एवं अमित पाटनी परिवार ने किया।
रांची रोड स्थित जैन मंदिर में भी प्रथम दिवस धार्मिक अनुष्ठान विधिवत संपन्न हुए। प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का पुण्यार्जन पदम सेठी परिवार ने किया।
मुनिश्री 108 पुण्यानंद जी महाराज, मुनिश्री 108 शुभानंद जी महाराज एवं क्षुल्लकश्री 105 दिव्यानंद जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में दसलक्षण महापर्व मनाया जा रहा है। प्रथम दिन मुनिश्री 108 शुभानंद जी महाराज ने उत्तम क्षमा धर्म पर मंगल प्रवचन दिया।
उन्होंने कहा कि क्षमा महज शब्द नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का मार्ग है। मनुष्य को क्रोध, मान, वैर और कटुता का त्याग कर प्रत्येक जीव के प्रति क्षमा, करुणा और मैत्री का भाव रखना चाहिए। क्षमा का भाव मन को निर्मल करता है और आत्मा को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।
पूजा, अभिषेक, शांतिधारा और मंगल प्रवचन के दौरान जिनालयों में देर तक भक्ति का वातावरण बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर उत्तम क्षमा धर्म के संदेश को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। उक्त जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी श्रवण जैन ने दी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश