सहकारी समितियों के रैपिड सर्वेक्षण के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित

 


रांची, 30 मार्च। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ), क्षेत्र संकाय प्रभाग, रांची की ओर से कार्यात्मक सहकारी समितियों के रैपिड सर्वेक्षण (आरएसएफसी) के लिए सोमवार को एक दिवसीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण शिविर (आरटीसी) का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण शिविर आगामी सर्वेक्षण को सफलतापूर्वक संचालित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

कार्यक्रम का उद्घाटन उप निदेशक आशीष कुमार तथा सहकारिता विभाग के सहायक निबंधक कालीचरण सिंह ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन सत्र में दोनों अधिकारियों ने सर्वेक्षण के महत्व और इसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उप निदेशक आशीष कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि सहकारी क्षेत्र देश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास का एक मजबूत स्तंभ है। यह विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, वित्तीय समावेशन और सामुदायिक सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि यह रैपिड सर्वेक्षण देश के 30 प्रमुख सहकारी क्षेत्रों से संबंधित सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए), उत्पादन तथा रोजगार के विश्वसनीय आंकड़े जुटाने में सहायक होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के आंकड़े सरकार को नीतियां बनाने, योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने और सहकारी क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने में मदद करेंगे।

प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने प्रतिभागियों को विशेष रूप से डेटा की गुणवत्ता बनाए रखने, फील्ड सर्वेक्षण में सटीकता सुनिश्चित करने और सभी अवधारणाओं को एक समान रूप से समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी गई कि यह सर्वेक्षण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर अगले छह महीनों तक पूरे देश में संचालित किया जाएगा। झारखंड राज्य में कुल 354 चयनित सहकारी समितियों का सर्वेक्षण किया जाएगा, जिसे आधुनिक वेब-आधारित प्रणाली के माध्यम से पूरा किया जाएगा। इस डिजिटल प्रक्रिया से डेटा संग्रहण, निगरानी और विश्लेषण में पारदर्शिता तथा तेजी आएगी।

प्रशिक्षण शिविर में विभिन्न जिलों से आए अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों द्वारा सर्वेक्षण की प्रक्रिया, प्रश्नावली की संरचना, डेटा एंट्री और रिपोर्टिंग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सहकारी क्षेत्र में सटीक और विश्वसनीय आंकड़े जुटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे भविष्य में योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar