एकलव्य विद्यालय के बच्चों ने प्राकृतिक सामग्री से तैयार किया मच्छर भगाने वाला स्प्रे

 






दुमका, 09 अक्टूबर (हि.स.)। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, फिटकोरिया, काठीकुंड में विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोरंजन केवट के मार्गदर्शन में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की ओर से स्थानीय संसाधनों के उपयोग से दो अभिनव प्रयोग प्रस्तुत किए गए। इन प्रयोगों का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, फिटकोरिया में विद्यार्थियों ने स्थानीय संसाधनों से किए दो अभिनव प्रयोग

पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय से तैयार किए वैकल्पिक उत्पाद के संबंध में जिला कल्याण पदाधिकारी गौतम मोदी ने बताया कि विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए नवाचार की दिशा में सराहनीय पहल की है। इस प्रकार के प्रयोग विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने तथा अपनी रचनात्मक क्षमता का विकास करने का अवसर प्रदान करते हैं।

पहले प्रयोग के अंतर्गत विद्यार्थियों ने मक्के के तने का उपयोग कर गुड़ जैसा उत्पाद तैयार करने का प्रयास किया। इस प्रयोग में मक्के के तने के साथ नींबू, पपीता एवं भिंडी के रस का उपयोग किया गया। इसका उद्देश्य ऐसा वैकल्पिक उत्पाद तैयार करने की संभावना तलाशना है, जिसमें सामान्य गुड़ की तुलना में शर्करा की मात्रा कम हो और ग्लाइसेमिक प्रभाव भी कम हो।

यह प्रयोग स्थानीय संसाधनों के माध्यम से खाद्य उत्पादों के नए विकल्प तलाशने की दिशा में विद्यार्थियों की रचनात्मक पहल को दर्शाता है।

प्राकृतिक सामग्री से तैयार किया मच्छर भगाने वाला स्प्रे

दूसरे प्रयोग में विद्यार्थियों ने प्राकृतिक सामग्रियों की मदद से मच्छर भगाने वाला स्प्रे तैयार किया। इसके निर्माण में नीम की पत्तियों, तुलसी की पत्तियों, लेमनग्रास, कपूर और सिरका जैसी सामग्रियों का उपयोग किया गया। इन सामग्रियों को पीसकर मिश्रण तैयार किया गया और निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से उसका अर्क निकालकर स्प्रे के रूप में उपयोग करने का प्रयास किया गया।

इस प्रयोग का उद्देश्य रासायनिक उत्पादों के विकल्प के रूप में प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उपायों की संभावनाओं को समझना है। हालांकि, इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक परीक्षण आवश्यक हैं।

पारंपरिक ज्ञान और विज्ञान के समन्वय पर जोर

प्रधानाचार्य मनोरंजन केवट ने कहा कि हमारी परंपराओं में प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग की समृद्ध समझ रही है।

आवश्यकता है कि पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए स्थानीय संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना सीखा जाए।

उन्होंने कहा कि जनजातीय बच्चों में ज्ञान की कमी नहीं है, बल्कि उन्हें अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। ऐसे प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों में यह विश्वास विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है कि विज्ञान केवल किताबों में नहीं, बल्कि हमारे आसपास भी मौजूद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नीरज कुमार