मुनिश्री 108 आराध्य सागरजी का मंगल प्रवेश, हुआ स्वागत
रामगढ़, 20 जून (हि.स.)। शहर के मेन रोड स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर और रांची रोड स्थित पारसनाथ जिनालय में आचार्यश्री विशुद्धसागरजी के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री 108 आराध्य सागरजी संघ का शनिवार को रामगढ़ में मंगल प्रवेश हुआ। इस दौरान गया से रांची की ओर विहार क्रम के दौरान मुनिसंघ रामगढ़ के दोनों जिनालयों में स्वागत हुआ।
मुनिसंघ को गाजे-बाजे के साथ नगर प्रवेश कराया गया। दोनों जिनालयों में प्रवेश के पहले भक्तों की ओर से पाद प्रक्षालन किया गया। जिनालय प्रवेश के बाद मुनिश्री ने अपनी वाणी से भक्तों को आत्म तत्व का ज्ञानोपदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्वयं को पहचानना और स्वयं से साक्षात्कार करना सर्वोच्च ज्ञान है। साथ ही उन्होंने प्रत्येक प्राणी में विद्यमान जीव और आत्मा का भी सारगर्भित रहस्य समझाया। उनके प्रवचन सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए जैन समाज के सचिव योगेश सेठी ने कहा कि हमारे जिनालयों में साधु संतों का निरंतर आगमन हो रहा है। पूर्व में एक संघ हमारे जिनालय में विराजित है और एक अन्य संघ का रामगढ़ में आना अत्यंत दुर्लभ अवसर है। सेठी ने कहा कि ज्ञान की इन सरिताओं का मिलन भक्तों का सौभाग्य है। साथ ही उन्होंने कहा कि ज्ञान की इन सरिताओं के एक साथ आने से पूरा जैन समाज में हर्ष व्याप्त है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष राजेंद्र चूड़ीवाल, मीडिया प्रभारी श्रवण जैन, देवेंद्र गंगवाल, राजू सेठी, नीरज सेठी, बबलू सेठी, बंटी सेठी, सुशील चूड़ीवाल, संजय सेठी, श्याम जैन, ललित गंगवाल, उषा अजमेरा, खुशबू चूड़ीवाल, सुनीता पाटनी सहित अन्य का योगदान रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश