एमएमडीआर संशोधन कानून के खिलाफ जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेगी झामुमो

 


रांची, 19 सितंबर (हि.स.)। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि खनिज कानून के खिलाफ पार्टी का आंदोलन प्रखंड मुख्यालयों से निकलकर अब गांव-गांव तक पहुंच गया है। झारखंड की जनता जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा के अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगी और एमएमडीआर संशोधन कानून के खिलाफ आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में पांडेय ने कहा कि एमएमडीआर संशोधन कानून केवल झारखंड के खनिज राजस्व से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इससे राज्यों के संवैधानिक अधिकार और वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित होने का सवाल भी जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार झारखंड की खनिज संपदा पर अपना अधिकार बढ़ाना चाहती है, जबकि राज्य के वर्षों पुराने बकाये के मुद्दे पर भाजपा जवाब देने से बच रही है।

झामुमो नेता ने कहा कि भाजपा ने 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये का हिसाब मांगा था, अब उसे भी इस राशि का हिसाब देना चाहिए। पांडेय के अनुसार, झारखंड सरकार के मुताबिक बकाये में करीब 1.01 लाख करोड़ रुपये भूमि मुआवजा, करीब 32 हजार करोड़ रुपये कॉमन कॉज से जुड़े बकाये तथा करीब 2,500 से 2,900 करोड़ रुपये वॉश्ड कोल रॉयल्टी समेत अन्य देनदारियां शामिल हैं।

विनोद पांडेय ने कहा कि झारखंड को खनन के कारण प्रदूषण, विस्थापन और पर्यावरणीय नुकसान के साथ सामाजिक कीमत भी चुकानी पड़ती है। ऐसे में खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व और राज्यों के अधिकारों को सीमित करने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि प्रखंड मुख्यालयों पर विरोध-प्रदर्शन के पहले चरण के बाद अब जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद राज्यस्तरीय आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि झामुमो इस मुद्दे को सड़क से लेकर संवैधानिक और कानूनी मंचों तक उठाएगा तथा झारखंड के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar