बाबूलाल मरांडी ने लगाया जेएसएससी नियुक्ति घोटाले की सीआईडी जांच में लीपापोती का आरोप, सीबीआई जांच की मांग
रांची, 13 सितंबर (हि.स.)। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) नियुक्ति घोटाले की अपराध जांच विभाग (सीआईडी) जांच में लीपापोती किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जांच की दिशा और सामने आ रही शिकायतें इस आशंका को मजबूत करती हैं कि छोटे आरोपितों पर कार्रवाई कर प्रभावशाली लोगों और कथित सरगनाओं को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। मरांडी ने मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है।
मरांडी ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि उन्हें ऐसी शिकायतें मिल रही हैं, जैसी आशंका पहले से थी। उनके मुताबिक, मामले में पकड़े गए या पूछताछ किए जा रहे लोगों की ओर से यदि किसी हाईप्रोफाइल नेता, अधिकारी या उनके कथित बिचौलियों के माध्यम से रिश्वत के लेन-देन और संलिप्तता की जानकारी दी जाती है, तो बयान से उन हिस्सों को हटाए जाने की शिकायत सामने आ रही है।
बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि जांच में शामिल कुछ छोटे अधिकारियों ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर यह शिकायत उन तक पहुंचाई है। इन अधिकारियों का आरोप है कि उनके विभागीय उच्चाधिकारी ऐसे नाम और तथ्य रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करने का दबाव बना रहे हैं।
मरांडी ने कहा कि यदि शिकायतें सही हैं तो यह जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा करने के साथ ही सच्चाई दबाने और प्रभावशाली लोगों को बचाने का मामला है।
नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि इतने संवेदनशील मामले में बयान दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होनी चाहिए। मूल वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना किसी छेड़छाड़ या एडिटिंग के सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि किसी अधिकारी को बयान में बदलाव करने या करवाने का अवसर नहीं मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी बयान में बड़े या प्रभावशाली व्यक्ति का नाम सामने आने पर उसे रिकॉर्ड में रखने को लेकर कथित तौर पर इतनी बेचैनी क्यों है।
मरांडी ने कहा कि जांच का उद्देश्य सच्चाई सामने लाना होना चाहिए, न कि किसी खास व्यक्ति को बचाना। उन्होंने नियुक्ति घोटाले में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग गुप्ता की भूमिका को लेकर उठे सवालों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उनके खिलाफ जांच को गलत दिशा में ले जाने, साक्ष्य नष्ट करने और नियुक्ति में घोटाले से इनकार करने जैसे गंभीर आरोप सामने आए थे।
उन्होंने कहा कि छात्रों और बेरोजगारों के बड़े आंदोलन के बाद सीआईडी के रुख में बदलाव आया। जिस मामले में शुरुआती दौर में घोटाले से इनकार किया जा रहा था, उसमें बाद की कार्रवाई उस शुरुआती रुख की जवाबदेही का सवाल भी खड़ा करती है।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि अब मनोज कौशिक की अगुवाई में चल रही सीआईडी जांच को लेकर भी ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि छोटी मछलियों को कार्रवाई के दायरे में लाकर बड़ी मछलियों और कथित असली सरगनाओं को जांच की आंच से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल छोटे स्तर के आरोपितों की गिरफ्तारी से बड़े नामों को लेकर उठ रही आशंकाएं दूर नहीं होंगी।
मरांडी ने जांच में शामिल अधिकारियों से कहा कि यदि बयानों से नाम हटाने, डिजिटल साक्ष्य मिटाने या दबाव डालकर मनमाने तरीके से बयान दर्ज कराने की कोशिश हो रही है तो उसे तत्काल रोका जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारी और निष्पक्षता बनाए रखने की अपील की।
बाबूलाल ने कहा कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने के लिए रिकॉर्ड से हटाया गया तथ्य भविष्य में संबंधित अधिकारियों की अपनी भूमिका पर सवाल बन सकता है। सीबीआई जांच होने पर मूल नियुक्ति घोटाले के साथ ही जांच को प्रभावित करने और साक्ष्य दबाने की शिकायतों की भी पड़ताल होनी चाहिए।
मरांडी ने अधिकारियों के सेवाकाल से जुड़े पुराने मामलों और सामने आने वाले प्रमाणों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी के पद से हट जाने के बाद उसके पूर्व कार्यों की जवाबदेही समाप्त नहीं हो जाती।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह मामला आने वाली पीढ़ी के अधिकारियों के लिए भी सबक है। सत्ता की कृपा पाने के लिए अधिकारियों को अपनी सेवा, साख और अंतरात्मा को दांव पर नहीं लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को बचाने के लिए आज सच दबाया जाएगा, जरूरी नहीं कि भविष्य में वही प्रभावशाली लोग संबंधित अधिकारी के साथ खड़े हों।
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि छात्रों और बेरोजगारों को दोबारा आंदोलन के लिए सड़क पर उतरने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से बिना विलंब सीबीआई जांच की अनुशंसा करने तथा सभी मूल बयान, वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि युवाओं की उम्र और उनके हाथ से निकल चुके अवसर वापस नहीं लौटाए जा सकते। इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितता और घोटाले के जिम्मेदार लोगों के साथ-साथ उन्हें बचाने या जांच को प्रभावित करने वालों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।-----------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे