केंद्रीय सरना समिति ने की नागपुरी फिल्म ‘सेरेंग’ पर रोक की मांग, आयोग को सौंपा ज्ञापन

 




रांची, 23 मई (हि.स.)। केंद्रीय सरना समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा से दिल्ली स्थित उनके आवास पर मुलाकात कर नागपुरी फिल्म ‘सेरेंग’ पर रोक लगाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने फिल्म पर आदिवासी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय अध्यक्ष बबलू मुंडा ने किया। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि झारखंड के सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही फिल्म ‘सेरेंग’ एक विशेष कथानक पर आधारित है, जिसमें आदिवासी लड़की और एक मुस्लिम युवक के प्रेम संबंध तथा धर्म परिवर्तन कर विवाह जैसे दृश्य दिखाए गए हैं। उनके अनुसार, यह फिल्म “लव जिहाद” को बढ़ावा देने वाली सामग्री प्रस्तुत करती है, जिससे समाज में गलत संदेश जा रहा है।

बबलू मुंडा ने आरोप लगाया कि फिल्म में आदिवासी समुदाय के खिलाफ अभद्र भाषा और आपत्तिजनक टिप्पणियों का प्रयोग किया गया है, जिससे उरांव और मुंडा जनजाति की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि आयोग को इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए फिल्म पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की दिशा में कार्रवाई करनी चाहिए।

समिति के महासचिव अशोक मुंडा ने भी आरोप लगाया कि फिल्म में सरना धर्म और सरना झंडा का अपमान किया गया है तथा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर आदिवासी समाज की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति आदिवासी समुदाय के लिए अस्वीकार्य है और इस पर सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के सदस्य को एक ज्ञापन सौंपते हुए फिल्म के निर्माता, निर्देशक और कलाकारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की। साथ ही उन्होंने झारखंड में बन रहे कुछ नागपुरी एल्बम और फिल्मों में कथित रूप से बढ़ती अश्लीलता पर भी रोक लगाने की मांग उठाई।

प्रतिनिधिमंडल में बबलू मुंडा, कार्यकारी अध्यक्ष शोभा कच्छप, प्रधान महासचिव अशोक मुंडा, महासचिव महादेव टोप्पो, प्रदीप मुंडा सहित अन्य सदस्य शामिल थे।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar