बूचड़खाना तोड़ने पहुंची नगर निगम की टीम का स्थानीय लोगों ने किया विरोध

 


रांची, 19 सितंबर (हि.स.)। राजधानी रांची के कर्बला चौक स्थित आजाद बस्ती इलाके में शनिवार को बूचड़खाना तोड़ने पहुंची नगर निगम की टीम को स्थानीय लोगों के विरोध के बाद वापस लौटना पड़ा। निगम की टीम बुलडोजर लेकर जैसे ही कसाई मुहल्ला पहुंची, बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए और कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया।

कार्रवाई के विरोध में वार्ड-17 की पार्षद फातिमा और वार्ड-16 के पार्षद सलाउद्दीन सहित अन्य लोग धरने पर बैठ गए। धरना दे रहे लोगों ने नगर निगम से मांग की कि दुकानों को तोड़ने से पहले कम से कम एक महीने का समय दिया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक प्रभावित दुकानदारों को स्थायी वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक दुकानों को नहीं तोड़ा जाए।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह परिसर करीब 90 वर्ष पुराना है। वर्ष 1972 में यहां सौंदर्यीकरण का काम कराया गया था और उस समय करीब 54 दुकानदारों को लाइसेंस दिए गए थे। करीब 18-19 डिसमिल जमीन पर लंबे समय से बूचड़खाना संचालित होता रहा है, जिससे सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है।

दुकानदारों ने बताया कि नगर निगम की ओर से कार्रवाई से एक दिन पहले शाम करीब पांच से छह बजे के बीच नोटिस चस्पा किया गया था। इसके अगले ही दिन निगम की टीम बुलडोजर लेकर पहुंच गई। दुकानदारों ने कहा कि उन्हें दुकानें खाली करने और वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

धरने पर बैठे पार्षदों ने आरोप लगाया कि वार्ड पार्षदों को कार्रवाई की जानकारी दिए बिना निगम की टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने मांग की कि जिन लोगों के नाम पर दुकानें आवंटित हैं, उन्हीं के नाम पर दुकानों का पुन: आवंटन किया जाए।

दुकानदारों ने बताया कि पिछले करीब एक वर्ष से दुकानें बंद हैं। इससे परिवार का खर्च चलाने के साथ बच्चों की ट्यूशन फीस और इलाज का खर्च जुटाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक इन दुकानों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन अब अचानक तोड़फोड़ के लिए निगम की टीम पहुंच गई। स्थानीय लोगों ने वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना कार्रवाई नहीं करने की मांग की।---------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे