करम पर्व प्रकृति के साथ जनजातीय समाज के गहरे संबंध का प्रतीक : राज्यपाल
रांची, 20 सितंबर (हि.स.)। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि करम पर्व झारखंड की जनजातीय संस्कृति और प्रकृति के साथ गहरे संबंध का प्रतीक है। उन्होंने करमा पूजा के अवसर पर राज्यवासियों को शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल रविवार को बेड़ो में आयोजित करम पर्व पूर्व संध्या समारोह को संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल ने कहा कि करम वृक्ष की डाली की स्थापना और पूजा के साथ सामूहिक नृत्य-संगीत की परंपरा झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की पहचान है। करम पर्व से जुड़ी लोककथाएं अच्छे कर्म, परिश्रम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश देती हैं।
उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जनजातीय समाज की जीवन पद्धति का हिस्सा रहा है। आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन की चुनौती से जूझ रही है।
ऐसे समय में करम पर्व का प्रकृति के सम्मान और संरक्षण का संदेश और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। इसकी परंपराएं प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण की प्रेरणा देती हैं।
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड की भाषाएं, लोकगीत, लोकनृत्य, लोककलाएं और पारंपरिक ज्ञान अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं। युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझना चाहिए। भाषा और परंपराओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। आधुनिक शिक्षा और तकनीकी ज्ञान के साथ संस्कृति से जुड़े रहने से पहचान और मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को अपने ज्ञान और अनुभव का लाभ ग्रामीण और वंचित वर्गों तक पहुंचाने के लिए आगे आना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड की विशेषता इसकी बहुरंगी संस्कृति और सामाजिक सद्भाव में भी है। यहां विभिन्न धर्मों, समुदायों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। पर्व-त्योहार लोगों को करीब लाते हैं। इससे आपसी भाईचारा मजबूत होता है और देश की विविधता में एकता की परंपरा भी सुदृढ़ होती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे