करम और सरहुल त्योहारों को ईसाई विधि से मनाने का होगा विरोध : सरना समिति

 


रांची, 18 सितंबर (हि.स.)। केंद्रीय सरना समिति और विभिन्न आदिवासी-जनजाति सामाजिक संगठनों ने शुक्रवार को प्रेस क्लब रांची में संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता कर चर्च में करम गाड़ने और आदिवासी पर्व-त्योहारों को ईसाई विधि से मनाने पर कडी आपत्ति जताई।

संगठनों ने इसे आदिवासियों की धार्मिक आस्था, परंपरा और संस्कृति से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

केंद्रीय सरना समिति ने आरोप लगाया कि ईसाईयों की ओर से लिखित खड़िया धर्म और संस्कृति पुस्तक और आदिवासी मिस्सा संग्रह में आदिवासी पर्व-त्योहारों के अध्ययन एवं संशोधन की बात कही गई है। समिति का आरोप है कि इसी आधार पर करम और सरहुल जैसे आदिवासी त्योहारों को ईसाई विधि से मनाने का प्रयास किया जा रहा है और चर्चों के अंदर बालू के टब में करम देवता को खड़ा किया जा रहा है।

संगठनों ने कहा कि आदिवासी समाज भादो एकादशी के दिन पूरे विधि-विधान, आस्था और उल्लास के साथ करम देवता की पूजा करता है। इस दौरान भाई-बहन, माता-पिता और समाज के लोग सामूहिक रूप से रातभर नृत्य-संगीत करते हैं। समिति ने आरोप लगाया कि करम पूजा की रात होने वाले सामूहिक नृत्य-संगीत को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की जाती है और इसे बुरा करम कहकर आदिवासी समाज से हटाने की बात की जाती है।

केंद्रीय सरना समिति और विभिन्न आदिवासी संगठनों ने कहा कि ईसाई समाज अपने पर्व-त्योहार मनाए, इससे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन आदिवासी पर्व-त्योहारों को आदिवासी नाम और पहचान के साथ ईसाई तरीके से मनाने का वे विरोध करेंगे। संगठनों ने सवाल उठाया कि आदिवासी पर्व-त्योहारों में संशोधन करने का अधिकार किसी अन्य धार्मिक संस्था को किसने दे दिया है। संगठनों ने बताया कि इस मामले को लेकर 16 सितंबर 2026 को रांची के उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर चर्चों में करम डाल गाड़ने पर रोक लगाने की मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि आदिवासियों की धार्मिक आस्था और परंपराओं के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रेस वार्ता में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा, मुख्य पाहन जगलाल पाहन, जनजाति सुरक्षा मंच के संदीप उरांव, डॉ बिरसा उरांव, सोमा उरांव, अंजलि लकड़ा, शनि उरांव, अजय कुमार भोगता, झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति के अध्यक्ष मेघा उरांव सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar