प्रकृति, परंपरा और संस्कृति से जुड़ने का पर्व है करम : शिल्पी तिर्की

 


रांची, 21 सितंबर (हि.स.)।

सरना समिति चान्हो के तत्वावधान में सरना बाल विकास उच्च विद्यालय, पोढ़ाटोली में करम पूर्व संध्या पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शामिल हुई।

इस मौके पर उन्होंने विभिन्न खोड़हा दलों के साथ पारंपरिक नृत्य में सहभागी बनकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। अखडा में मौजूद महिलाओं के साथ नृत्यर कर कार्यक्रम का आनंद उठाया। इस अवसर पर मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि करम पर्व प्रकृति के संरक्षण, भाईचारे और सामुदायिक एकता का संदेश देता है। करम न सिर्फ एक पर्व बल्कि प्रकृति, परंपरा, संस्कृति और सामुदायिक एकता से जुड़ने का अवसर है। हमारी आदिवासी संस्कृति और प्रकृति आधारित जीवन-दर्शन अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है।

इस अवसर पर उन्होंने आयोजन समिति, खोड़हा दलों और चान्होवासियों को करम पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पुरखों ने जल, जंगल, जमीन और प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों को जीवन का आधार मानकर उनके प्रति श्रद्धा की परंपरा विकसित की। त्योहार समाज के लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं। आज के युवाओं को आधुनिकता के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और पुरखों के जीवन-दर्शन को समझना चाहिए। कार्यक्रम में सरना समिति के पदाधिकारी, विभिन्न खोड़हा दलों के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar