धूमधाम और पौराणिक परंपरा के साथ मनी करम एकादशी

 

देवघर, 22 सितंबर (हि.स.)। भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक करम एकादशी का पर्व मंगलवार को जिलेभर में धूमधाम और पौराणिक परंपरा के अनुसार मनाया गया। पर्व को लेकर महिलाओं और बच्चियों में खासा उत्साह देखा गया। बहनों ने अपने भाइयों की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर निर्जला या फलाहार व्रत रखा और विधि-विधान से करम डाली की पूजा-अर्चना की।

पर्व के तहत महिलाओं ने डाला में जावा भरा और करम डाली की पूजा कर परिवार की सुख-शांति और भाइयों के लिए मंगलकामना की। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम के साथ-साथ प्रकृति आराधना से भी जुड़ा हुआ है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाए जाने वाले इस पर्व को पद्मा एकादशी और पार्श्व परिवर्तनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस अवसर पर कुश और राढ़ी घास से भगवान श्रीहरि विष्णु के नारायण स्वरूप की प्रतिमा बनाई जाती है। इसके साथ ही शिव-पार्वती की भी आराधना की जाती है। वहीं शाम के बाद विभिन्न स्थानों पर आंगन और नदी तटों पर जागरण, भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। इस दौरान कर्मा-धर्मा नामक दो भाइयों की पौराणिक कथा भी श्रद्धापूर्वक सुनी गई।

पर्व को लेकर सोमवार को नहाय-खाय के साथ व्रत की शुरुआत हुई। व्रतियों ने सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का संकल्प लिया। इसके बाद मंगलवार को बहनों ने दिनभर उपवास रखकर पूजा-अर्चना की और अपने भाइयों की दीर्घायु एवं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की।

इस वर्ष उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र के संयोग में कर्मा-धर्मा एकादशी का पर्व मनाया गया। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पारंपरिक गीत-संगीत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पर्व का उल्लास देखने को मिला।

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हिन्दुस्थान समाचार / Anup Kumar Roy