समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी आदिवासी बच्चों की जान : लुईस मरांडी
रांची, 10 सितंबर (हि.स.)।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह विधायक लुईस मरांडी और तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने मध्यप्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाया है।
लुईस मरांडी ने गुरूवार को झामुमो के केंद्रीय कार्यालय हरमू में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि बालाघाट में पिछले करीब एक महीने में बैगा और गोंड आदिवासी समुदाय के 30 से अधिक बच्चों की मौत हुई है। बावजूद इसके केन्द्र सरकार ने इसकी समय पर सुधी नहीं ली। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश सरकार ने समय पर बच्चों के इलाज और देखभाल पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि समय रहते सरकार जागती और इलाज की समुचित व्यवस्था की होती तो कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
उन्होंने भाजपा सरकारों पर आदिवासी समाज की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए जल, जंगल, जमीन, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य के अधिकारों की बात उठाई।
इस अवसर पर तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने कहा कि आदिवासी आश्रमों में बच्चों की मौत सामान्य घटना नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही का गंभीर मामला है। उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग की। साथ ही मृत बच्चों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की।
दोनों नेताओं ने एमएमडीआर नीति में बदलाव का विरोध करते हुए आदिवासी क्षेत्रों के अधिकार कमजोर होने की आशंका जताई। गुड़िया ने कहा कि मध्यप्रदेश के आदिवासी आश्रमों में बच्चों की मौत सामान्य घटना नहीं है। यह सरकार की बड़ी लापरवाही को दिखाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर ये बच्चे आदिवासी नहीं होते तो शायद सरकार इतनी देर तक मामले को नजरअंदाज नहीं करती। गुड़िया ने कहा कि जब बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हो गई, तब सरकार हरकत में आई। इसके बाद उच्च न्यायालय को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar