परिसीमन में झारखंड और दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व हो सकता है कम : सुप्रियो

 


रांची, 15 अप्रैल (हि.स.)। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रस्तावित 121 वें संविधान संशोधन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 में महिला आरक्षण कानून पारित होने के बावजूद नए संशोधन की आवश्यकता पर स्पष्टता नहीं है।

सुप्रियो ने आरक्षण लागू करने में देरी पर चिंता जताते हुए कहा कि जनगणना और परिसीमन का हवाला देकर इसे 2029 तक टालना उचित नहीं है। सुप्रियो बुधवार को पार्टी के हरमू स्थित केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बोल रहे थे। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए दोहराया कि जिन राज्यों में सत्ता पक्ष मजबूत है, वहां सीटें बढ़ाने की कोशिश हो रही है, जबकि झारखंड और दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम किया जा सकता है। उन्होंने इसे संसद में कानूनी तरीके से हस्तक्षेप करार दिया।

परिसीमन आयोग को लेकर भी उन्होंने आशंका प्रकट करते हुए कहा कि यह निष्पक्ष तरीके से काम नहीं करेगा। भट्टाचार्य ने जातीय जनगणना को आवश्यक बताते हुए कहा कि सही आंकड़ों के बिना सीटों का संतुलित बंटवारा संभव नहीं है। उन्होंने परिसीमन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और क्षेत्रीय असंतुलन की आशंका जताई।

उन्होंने सहयोगी दलों से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की और कहा कि झामुमो इस विषय पर सदन से लेकर सड़क तक आंदोलन करेगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 18 से 20 अप्रैल तक पश्चिम बंगाल दौरे पर रहेंगे और चुनाव प्रचार में भाग लेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar