बार्टरवाटर मॉडल से जल संरक्षण को सामुदायिक भागीदारी से जोड़ने की पहल
रांची, 10 अगस्त (हि.स.)।
जल संकट, भूजल प्रदूषण और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच पानी और प्रकृति को विकास के केंद्र में रखकर बार्टरवाटर पहल के माध्यम से नया सामुदायिक मॉडल विकसित किया जा रहा है।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया गया कि यह मॉडल बिहार के बाद झारखंड और असम में भी विस्तार पा रहा है। पहल का लक्ष्य पानी, प्रकृति, तकनीक और समुदाय को जोड़कर स्थानीय स्तर पर टिकाऊ विकास का मॉडल तैयार करना है। विज्ञप्ति में बताया गया कि विल्सु ग्लोनबल फाउंडेशन, वीन फाउंडेशन और वाटर बैंक फाउंडेशन की साझेदारी से संचालित इस पहल का उद्देश्य स्वच्छ पेयजल, जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक-दूसरे से जोड़ना है।
इस वाटर बैंक व्यवस्था को सौर ऊर्जा से संचालित करने के लिए हस्कस पावर सिस्टम जैसी संस्थाओं का सहयोग लिया गया है। आईआईटी, खड़गपुर की तकनीक के व्यावसायीकरण की दिशा में वास ब्रोस इंटरप्राईजेज काम कर रहा है। इस पहल को विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी सहयोग मिला है।
इस मॉडल में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों के लिए रेनबो क्रेडिट दिए जाते हैं। आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में जल शोधन के लिए आईआईटी खड़गपुर की ओएएस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस पहल के तहत जल प्रबंधन में डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को भी जोड़ा जा रहा है। अलॉट और डिजिटल ट्वीन के माध्यम से जल संसाधनों की निगरानी, जल-कुशल कृषि और भविष्य की जरूरतों के आकलन पर काम किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar