वैश्विक समस्याओं का समाधान कर सकती है भारतीय ज्ञान प्रणाली : बीएन साह
रामगढ़, 23 अप्रैल (हि.स.)। राधा गोविंद विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन गुरुवार को संपन्न हो गया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय एनईपी 2020 में भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) : वैश्विक परिप्रेक्ष्य में रहा। जिसमें देश-विदेश से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इस सम्मेलन में 1600 प्रतिभागी शामिल हुए। जिसमें 500 प्रतिभागियों ने पेपर प्रस्तुत किया।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ अनिल कुमार ने कहा कि भारतीय प्राचीन शिक्षा प्रणाली में नैतिकता शिक्षा का आधार रही है, जो विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ संस्कार और सदाचार भी प्रदान करती है। सम्मेलन के विभिन्न तकनीकी सत्रों में वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, योग एवं दर्शन की वैश्विक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक शिक्षा से जोड़ते हुए एक समग्र एवं मूल्य-आधारित शिक्षा प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बीएन साह ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल भारत तक सीमित नहीं है। यह वैश्विक समस्याओं जैसे पर्यावरण संरक्षण, नैतिक मूल्यों एवं सतत विकास के समाधान में भी सहायक सिद्ध हो सकती है। वहीं, विश्वविद्यालय की सचिव प्रियंका कुमारी ने भारतीय शिक्षा पद्धति की सराहना करते हुए इसे विश्व के लिए प्रेरणादायक बताया। जबकि, विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि इस सम्मेलन ने वैश्विक मंच पर भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता को और अधिक सशक्त रूप से प्रस्तुत किया है।
कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ रंजना पांडेय और डॉ अमरेश पांडेय ने संयुक्त रूप से किया। मौके पर विश्वविद्यालय सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, व्याख्यात, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश