स्कूल फी और कॉपी की खरीदारी में मनमानी पर निजी विद्यालयों पर लगेगा 2.50 लाख तक का जुर्माना
रांची, 20 मार्च (हि.स.)। झारखंंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम-2017 के प्रावधानों के पालन में डीसी मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में सभी निजी विद्यालयों के शुल्क निर्धारण करने के लिए जिला स्तरीय जांच और निर्णय कमिटी का गठन किया गया है। इसके तहत अब यदि कोई विद्यालय किसी विशेष प्रतिष्ठान से पुस्तक कॉपी और जूता सामानों की खरीदारी करने के लिए अभिभावक-छात्रों को बाध्य या प्रेरित नहीं करेगा। यदि ऐसा हुआ तो नियमानुसार ऐसे स्कूल प्रबंधन पर 50 हजार से 2.50 लाख रूपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही दोषी विद्यालय की मान्यता भी समाप्त की जाएगी।
मंजुनाथ ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि निजी विद्यालय अब मनमाने ढंग से फीस वृद्धि नहीं कर सकेंगे। अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी। यदि संबंधित विद्यालय परिसर में पुस्तकें, यूनिफॉर्म, जूते या अन्य सामग्रियों का क्रय-विक्रय नहीं किया जाएगा तो कार्रवाई होना तय है।
उपायुक्त ने कहा है कि अभिभावकों के हित और शिक्षा की गुणवत्ता-पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी निजी विद्यालय अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन करें। किसी भी प्रकार की शिकायत होने पर जिला स्तरीय कमिटी से संपर्क करें।
जिला स्तरीय कमिटी में कमेटी के अध्यक्ष रांची के उपायुक्त, सदस्यों में जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला परिवहन पदाधिकारी, चार्टर्ड एकाउंटेंट, निजी विद्यालयों के दो प्राचार्य, गुरूनानक सीनियर सेकेंडरी स्कूूल और डीएवी कपिलदेव, रांची, दिल्ली पब्लिक स्कूल, रांची के एक अभिभावक, जवाहर विद्यालय मंदिर श्यामली, रांची के एक अभिभावक शामिल होंगे। इसके अलावे इस कमेटी में रांची जिले के सभी सांसद और विधायक भी इस समिति के सदस्य के रूप में शामिल होंगे।
उपायुक्त ने कहा है कि यह कमेटी नियमानुसार निर्धारित शुल्क से अधिक फीस वसूलने वाले विद्यालयों पर उचित निर्णय लेगा। कमिटी के गठन से निजी विद्यालय अब मनमाने ढंग से फीस वृद्धि नहीं कर सकेंगे और अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक निजी विद्यालय को विद्यालय स्तरीय शुल्क निर्धारण कमिटी के साथ-साथ अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) का भी गठन करने, कमिटी के गठन और सदस्यों की जानकारी विद्यालय के नोटिस बोर्ड एवं आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदर्शित किए जाने, जिला स्तरीय कमिटी को शुल्क निर्धारण के साथ-साथ गवाहों को सम्मन जारी करने का निर्देश शामिल है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar