मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई किसी एक विभाग की नहीं पूरे समाज की लड़ाई : प्रधान जज
दुमका, 25 अगस्त (हि.स.)। जिला विधिक सेवा प्राधिकार एवं एनजीओ प्रवाह के सहयोग से बाल संरक्षण एवं मानव तस्करी जैसे गंभीर सामाजिक विषयों पर पैरालीगल वॉलंटियर्स के लिए न्याय सदन भवन में मंगलवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन पीडीजे सुधांशु कुमार शशि, फैमली जज योगेश्वर मनी, डीजे वन प्रकाश झा, प्राधिकार सचिव विवेक कुमार, एसडीजेएम, मोहित चौधरी, प्रवाह सचिव दिलीप कुमार दुबे तथा रिसोर्स पर्सन डॉ राजकुमार उपाध्याय ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर प्रधान जज सुधांशु कुमार शशि ने कहा कि बच्चे सिर्फ देश का भविष्य नहीं हैं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी हैं। जिस तरह अभिभावक अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए पूरी ताकत लगाते हैं, उसी तरह समाज और नागरिकों की भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। न्यायपालिका, पुलिस, प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और समुदाय—सभी को मिलकर काम करना होगा। अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन करने पर ही मानव तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पीएलवी को बाल अधिकारों, बाल संरक्षण कानूनों तथा मानव तस्करी की रोकथाम से संबंधित कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक एवं सक्षम बनाना था, ताकि वे समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों तक प्रभावी रूप से विधिक सहायता एवं जागरूकता पहुंचा सकें। प्रशिक्षण के दौरान रिसोर्स पर्सन डॉ राजकुमार उपाध्याय ने बाल अधिकार, बाल विवाह, बाल श्रम, बाल तस्करी, मानव तस्करी, बच्चों के शोषण एवं संरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
साथ ही, संकट की स्थिति में बच्चों की पहचान, उनके बचाव, पुनर्वास तथा संबंधित सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई।
डीसीपीओ प्रकाश चंद्र ने बताया कि मानव तस्करी एक गंभीर अपराध है, जिसमें बच्चों एवं महिलाओं को बहला-फुसलाकर, प्रलोभन देकर या अन्य माध्यमों से शोषण के लिए ले जाया जाता है। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए समाज में जागरूकता फैलाने तथा संदिग्ध गतिविधियों की सूचना संबंधित सक्षम प्राधिकार को देने में पीएलवी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को बाल संरक्षण तंत्र, डालसा की भूमिका, निःशुल्क विधिक सहायता, पीड़ित बच्चों के पुनर्वास तथा संबंधित प्राधिकारों से समन्वय के संबंध में भी जानकारी दी गई।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विषयों पर चर्चा की तथा क्षेत्र में कार्य करते समय आने वाली व्यवहारिक चुनौतियों एवं उनके समाधान के संबंध में अपने-अपने क्षेत्रों में बाल संरक्षण एवं मानव तस्करी के विरुद्ध व्यापक जागरूकता अभियान चलाने को कहा गया। प्राधिकार की ओर से कहा गया कि बच्चों की सुरक्षा और मानव तस्करी की रोकथाम सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसके लिए प्रशासन, पुलिस, विधिक सेवा संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों एवं समाज के सभी वर्गों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
कार्यक्रम में प्रवाह के सचिव दिलीप कुमार दुबे प्रवाह टीम के सदस्य प्रेम कुमार वरुण पांडे और चिंता कुमारी उपस्थित थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / नीरज कुमार