अस्पतालों में हिंसा और भ्रामक सोशल मीडिया प्रचार पर प्रशासन करे कार्रवाई : आईएमए-एचबीआई
रांची, 24 जुलाई (हि.स.)।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन–हॉस्पिटल बोर्ड ऑफ इंडिया (आईएमए-एचबीआई) और एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) (एएचपीआई) की संयुक्त ऑनलाइन बैठक शुक्रवार को आयोजित हुई।
बैठक में संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर वातावरण, मरीजों और चिकित्सकों के बीच विश्वास को सुदृढ़ करने एवं अस्पतालों में सुरक्षित तथा पारदर्शी कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया। बैठक में कहा गया कि राज्य के अधिकांश चिकित्सक और अस्पताल पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और पेशेवर नैतिकता के साथ मरीजों की सेवा कर रहे हैं। फिर भी हाल के कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रमों ने यह आवश्यकता महसूस की गई है कि मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच संवाद एवं विश्वास को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।
मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सकों का सुरक्षित कार्य वातावरण एक-दूसरे के पूरक
बैठक में दोनों संगठनों ने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण उपचार और चिकित्सकों का सुरक्षित कार्य वातावरण एक-दूसरे के पूरक हैं। अस्पतालों में हिंसा, धमकी, जबरन वसूली, ब्लैकमेल, अवैध हस्तक्षेप और भ्रामक एवं अपुष्ट सूचनाओं का प्रसार न केवल चिकित्सकों और अस्पतालों के लिए, बल्कि मरीजों के हितों एवं पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए भी हानिकारक है। बैठक में कहा गया कि हाल के दिनों में रांची के सैंफोर्ड अस्पताल, राज अस्पताल, विवेकानंद अस्पताल सहित अन्य चिकित्सा संस्थानों में हुई घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं।
विशेष रूप से विवेकानंद अस्पताल की घटना में, जिस व्यक्ति की अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही मृत्यु हो चुकी थी और जिसे अस्पताल में भर्ती भी नहीं किया गया था। इस मामले में भी अस्पताल में अनावश्य क हंगामा किया गया। साथ ही अस्पताल के कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और चिकित्सीय कार्य में बाधा पहुंचाई गई। ऐसे कृत्या चिकित्सा व्यवस्था एवं समाज दोनों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं। प्रशासन को ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके विरूद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar