रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार के लिए तैयार डीपीआर की प्रगति पर उच्च न्यायालय ने मांगी रिपोर्ट
रांची, 13 अक्टूबर (हि.स.)। रामगढ़ के रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार से जुड़े संजीव कुमार सिंह की अवमानना याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय में मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान पर्यटन विभाग के सचिव की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया गया। उनकी ओर से बताया गया कि रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार के लिए तैयार की गई 102 करोड़ की डीपीआर को विभागीय मंत्री के पास भेजा गया है, वहां से वित्त विभाग में जाएगा। वित्त विभाग से अप्रूवल मिलने के बाद इसे कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। इसके बाद डीपीआर की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी जाएगी।
अदालत ने कहा कि शपथ पत्र में मंदिर के पुनरुद्धार के लिए तैयार की गई 102 करोड़ की डीपीआर को पूरी तरह से स्वीकृति कब तक मिल जाएगी, इसका टाइम फ्रेम नहीं दिया गया है। अदालत ने पर्यटन सचिव को 20 नवंबर तक शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने उनसे रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार के लिए तैयार डीपीआर की प्रगति पर अगली सुनवाई में रिपोर्ट मांगी है। अदालत के आदेश के आलोक में रामगढ़ डीसी और पर्यटन विभाग सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट के समक्ष मंगलवार को उपस्थित हुए। मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने पक्ष रखा।
दरअसल उच्च न्यायालय ने पूर्व की सुनवाई में कहा था कि वर्ष 2023 में एक जनहित याचिका में मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण के संदर्भ मंष आदेश पारित किए थे। मां छिन्नमस्तिका मंदिर के निकट स्थित भैरवी नदी तट पर सुरक्षा के अभाव में कई लोगों की मौत हो रही है। ऐसे में उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन जरूरी है, ताकि वहां सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सके।
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी ने संजीव कुमार सिंह ने अवमानना याचिका दाखिल कर झारखंड उच्च न्यायालय एक जनहित याचिका में 11 अगस्त 2023 को परित आदेश का अनुपालन कराने का आग्रह किया है। परित आदेश में उच्च न्यायालय ने झारखंड राज्य, पर्यटन विभाग, झारखंड पर्यटन विकास निगम और रामगढ़ जिला प्रशासन को 10 अनिवार्य निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों में मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, स्थायी स्नान घाटों का निर्माण, वस्त्र बदलने के कक्ष, शौचालयों की व्यवस्था, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सीय सुविधाएं सुनिश्चित करना, अतिक्रमण हटाना, नदी का चौड़ीकरण शामिल हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे