रिम्स के जवाब पर उच्च न्यायालय नाराज, पूछा- आदेश का अनुपालन क्यों नहीं हुआ
रांची, 30 जुलाई (हि.स.)। राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) से जुड़े जनहित याचिका की सुनवाई झारखंड उच्च न्यायालय में हुई। मामले में रिम्स की ओर से 21 जुलाई को दायर शपथ पत्र पर कोर्ट ने असंतोष जताया।
उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायामूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि रिम्स में नियुक्तियां करने, आवश्यक मशीनरी एवं उपकरणों की खरीद और जर्जर भवनों की आपातकालीन मरम्मत जैसी महत्वपूर्ण कार्य पूरे नहीं किए गए हैं।
न्यायालय ने स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल कर इन कार्यों को अब तक क्यों नहीं पूरा किया जा रहा है इसका निरीक्षण कर जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही इस संबंध में शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
18 फरवरी 2026 को उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने रिम्स के विभिन्न कार्यों के लिए निर्धारित मूल समय-सीमा पर रिम्स के अनुरोध पर 3 से 6 माह तक का समय-विस्तार दिया था। रिम्स में चिकित्सा संवर्ग के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए दो माह (10.10.2025 से) मूल समय-सीमा थी, जिसपर रिम्स की ओर से 6 माह का समय-विस्तार मांगा गया था। सीनियर रेजिडेंट/ट्यूटर की भर्ती के लिए 2 माह (10.10.2025 से) मूल समय-सीमा थी, जिसपर रिम्स की ओर से 3 माह का समय-विस्तार मांगा गया था। वर्ग-III एवं नर्सिंग पदों पर नियुक्ति 2 माह (10.10.2025 से) मूल समय-सीमा थी, जिस पर रिम्स की ओर से 6 माह समय-विस्तार मांगा गया था।
2 माह (10.10.2025 से) मूल समय-सीमा थी, जिस पर रिम्स की ओर से 6 माह समय-विस्तार मांगा गया था। मशीनरी एवं उपकरणों की खरीद 1 माह (10.10.2025 से) मूल समय-सीमा थी, जिस पर रिम्स की ओर से कार्य जारी है कहते हुए अतिरिक्त छह माह की आवश्यकता बताई गई थी।
रिम्स में भवनों का निर्माण/जीर्णोद्धार 4 माह (10.10.2025 से) मूल समय-सीमा थी, जिस पर रिम्स की ओर से कहा गया था कि इसका अनुपालन झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जाना है। रिम्स में जर्जर भवनों की आपातकालीन मरम्मत के लिए 4 माह (10.10.2025 से) मूल समय-सीमा थी, जिस पर रिम्स की ओर से 6 माह समय-विस्तार मांगा गया था।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे