महिला उत्पीडन के आरोपित रसूखदाराें पर भी हो आम लोगों की तरह कार्रवाई : एपवा

 


रांची, 14 अक्टूबर (हि.स.)। अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (एपवा) की राज्य की सह सचिव नंदिता भटटाचार्य ने झारखंड में बढ़ते महिला हिंसा, आदिवासी महिलाओं के साथ हो रहे पुलिसिया दमन और नाबालिग बच्चियों से दुष्किर्म की घटनाओं पर चिंता प्रकट की है। बुधवार को भाकपा माले कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्हों ने राज्य की पुलिस प्रशासन पर महिलाओं सुरक्षा पर विफल होने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि

पांच अक्टूबर 2026 को जिस तरह से लातेहार के बरियातू थाना के प्रभारी प्रभात कुमार दास और कांस्टेबल मनीष राम की ओर से एक आदिवासी महिला को जातिसूचक गालियां देने और उन्हें उल्टा लटका कर पिटाई करने के खिलाफ मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह स्थिति राज्य भर में आदिवासी महिलाओं पर पुलिस या दमन की स्थिति को दर्शाता है। वहीं

दुमका में नौ अक्टूबर को नाबालिग की दुष्कर्म के बाद हत्या मामले को लेकर पुलिस की ओर से सिर्फ एक आरोपित को पकड़ने पर भी अब तक स्पष्ट नहीं है कि प्रशासन सही अपराधियों तक पहुंच पाई है या नहीं।

सह सचिव ने कहा कि कोडरमा के सिविल सर्जन पर लगे नाबालिग के यौन शोषण की आरोप के 48 घंटे बाद भी उन्हें पद से निलंबन नहीं करना पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा करता है। उन्होंने बताया कि

इस घटना से जुड़ी एक गवाह संगठन के सामने आई है जिसने बताया कि सिविल सर्जन डॉ अनिल कुमार यादव नर्स के कमरे में ही नाबालिग को रखने का दबाव बना रहे थे। ताकि वे आसानी से उस कमरे में आ जा सकें और अपनी गलत हरकत कर सकें। उन्हों ने बताया कि जब नर्स ने यह करने से इंकार कर दिया तो उसकी नौकरी ही छीन ली गई।

वहीं मौके पर झारखंड जन अधिकार सभा की अपूर्व ने कहा कि ऐसे मामलों के आरोपित रसूखदार लोगों भी आम लोगों की तरह कार्रवाई होनी चाहिए।

मौके पर एपवा की गीत तिर्की, झारखंड जन अधिकार महासभा की अपूर्वा सहित संगठन की अन्यस सदस्य मौजूद थीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak