गुरुकुल शिक्षा राष्ट्र निर्माण भावना विकसित करने का माध्यम : नमर्देश्वर
रांची, 22 मई (हि.स.)।
सरस्वती शिशु विद्या मंदीर, धुर्वा में चल रहे छह दिवसीय आचार्य प्रशिक्षण वर्ग सह कार्यशाला का पांचवां दिन शुक्रवार को सकारात्मक और प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पार्चन और सरस्वती वंदना के साथ किया गया। वैचारिक सत्र को संबोधित करते हुए शिशु विकास मंदिर समिति (झारखंड) के सदस्य और अधिवक्ता नमर्देश्वर मिश्रा ने गुरुकुल शिक्षा पद्धति एवं व्यक्तित्व निर्माण विषय पर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि गुरुकुल शिक्षा पद्धति केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं थी, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने का माध्यम भी थी। उन्होंने बताया कि गुरुकुलों में मूल रूप से 18 विषयों की शिक्षा दी जाती थी।
वर्तमान समय में इस पद्धति के नवाचारपूर्ण प्रयोग से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण को नई दिशा दी जा सकती है।
इसके बाद शिक्षकों के लिए आयोजित कार्यशाला में पटेल बीएड कॉलेज की प्राचार्या डॉ अनुराधा कुमारी ने 21 वीं सदी का कक्षाकक्ष विषय पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने आधुनिक शिक्षा पद्धति, तकनीकी संसाधनों और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर जोर दिया। अंतिम सत्र में खेल, प्राणायाम और योगासन का अभ्यास कराया गया। कार्यक्रम में डॉ धनेश्वर महतो, लाल अशोकनाथ शाहदेव, अनिल झा, प्राचार्य ललन कुमार, उप-प्राचार्या मीना कुमारी सहित विद्यालय के सभी शिक्षक मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar