बड़ी डिग्री नहीं, बड़ा उद्देश्य जीवन को बनाता है बड़ा : राज्यपाल
रांची, 28 सितंबर (हि.स.)। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें, बल्कि बड़े उद्देश्य के लिए करें। उन्होंने कहा कि बड़ी डिग्री से बड़ा जीवन नहीं बनता, बल्कि बड़ा उद्देश्य जीवन को बड़ा बनाता है। राज्यपाल सोमवार को झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जेयूटी), रांची के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थी ऐसे समय में विश्वविद्यालय से निकल रहे हैं, जब विज्ञान और तकनीक मानव जीवन एवं कार्यक्षेत्र को तेजी से बदल रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं उभर रही हैं। वहीं, डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और डीपफेक जैसी चुनौतियां भी सामने हैं। ऐसे में भविष्य केवल तकनीकी दक्षता रखने वालों का नहीं, बल्कि तकनीक का उपयोग विवेक, नैतिकता और मानवीय मूल्यों के साथ करने वालों का होगा।
राज्यपाल ने कहा कि तकनीकी शिक्षा विद्यार्थियों को समस्याओं को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने की क्षमता देती है। इसलिए लक्ष्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने ज्ञान और कौशल के माध्यम से नए अवसर और रोजगार का सृजन करना भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर नवाचार एक सवाल से शुरू होता है कि किसी चीज को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। निरंतर सीखना, प्रश्न पूछना और नई संभावनाओं की तलाश करना ही प्रगति का आधार है। विद्यार्थियों को समस्या के कारण के साथ-साथ उसके समाधान पर भी विचार करना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों के साथ युवा प्रतिभा और व्यापक संभावनाओं से समृद्ध राज्य है। जेयूटी को अपने तकनीकी ज्ञान और अनुसंधान को राज्य की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना चाहिए। जल, ऊर्जा, खनन, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, ग्रामीण विकास और जनजातीय क्षेत्रों में तकनीक आधारित स्थानीय समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब प्रयोगशाला का ज्ञान धरातल की जरूरतों से जुड़ता है, तभी तकनीक की वास्तविक शक्ति सामने आती है।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से तकनीकी दक्षता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि तकनीकी ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग समाज और राज्य की समस्याओं के समाधान में किया जाए। झारखंड की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने से शिक्षा और तकनीक का लाभ व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।
आठ विद्यार्थियों को मिला स्वर्ण पदक
द्वितीय दीक्षांत समारोह में तकनीकी और प्रबंधन पाठ्यक्रमों के टॉपर विद्यार्थियों को शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। कुल आठ विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल मिला। इनमें चार बीटेक और चार एमटेक व एमबीए स्तर के विद्यार्थी शामिल हैं। बीआईटी सिंदरी के विद्यार्थियों के हिस्से 8 में से 5 स्वर्ण पदक आए हैं। इनमें प्रीति कुमारी, आलोक रंजन, आरती कुमारी, शालिनी भारद्वाज और अविनाश कुमार शामिल हैं। वहीं, जेयूटी मुख्य परिसर, नामकुम (रांची) के विद्यार्थियों ने एमटेक एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग में 2 गोल्ड मेडल हासिल किए हैं, इनमें राहुल कुमार और चंद्रकांत कुमार शामिल हैं, जबकि, बोकारो स्थित जीजीएसईएसटीसी कैंपस की छात्रा शहनाज फरहीन ने एमबीए में गोल्ड मेडल हासिल किया है।
सिरखा टोली, नामकुम स्थित जेयूटी परिसर के सभागार में आयोजित समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीके सिंह ने की। राज्यपाल-सह-कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सेल, बोकारो के निदेशक प्रिय रंजन और डीवाई पाटिल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. प्रभात रंजन विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे