जीआईएस आधारित एसेट मैपिंग में रांची नगर निगम की बड़ी उपलब्धि, मिली पांच करोड़ की राशि
रांची, 10 मई (हि.स.)। रांची नगर निगम की तकनीक आधारित शहरी प्रशासनिक पहल को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता मिली है। भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) की ओर से संचालित स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट 2025-26 योजना के अंतर्गत शहरी सुधार (अर्बन प्लानिंग रिफॉर्म्स) के लिए झारखंड राज्य को पांच करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि रविवार को स्वीकृत की गई है।
इसको लेकर अपर नगर आयुक्त संजय कुमार ने कहा कि रांची नगर निगम लगातार तकनीक आधारित प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है। जीआईसी आधारित एसेट मैपिंग से निगम की परिसंपत्तियों का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित प्रबंधन संभव हो सकेगा। जिससे भविष्य की विकास योजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार यह जीआईएस डेटा भविष्य की स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, डिजिटल गवर्नेंस और शहरी विकास योजनाओं के लिए भी उपयोगी साबित होगा। रांची नगर निगम ने इस उपलब्धि के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग, जेएसएसी तथा इस परियोजना से जुड़े सभी पदाधिकारियों और कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि
यह उपलब्धि रांची नगर निगम की ओर से नगर निगम परिसंपत्तियों की जीआईसी आधारित मैपिंग एवं शहरी क्षेत्रों में सरकारी भूमि की डिजिटल इन्वेंट्री तैयार करने के कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किए जाने के परिणामस्वरूप हासिल हुई है। रांची नगर निगम ने यह महत्वपूर्ण कार्य झारखंड एप्लीकेशन सेंटर (जेएसएसी) के तकनीकी सहयोग से पूरा किया।
इसके अंतर्गत निगम की विभिन्न परिसंपत्तियों, भवनों, बाजारों, कार्यालयों, बस टर्मिनलों, सामुदायिक भवनों, पार्कों एवं अन्य शहरी संपत्तियों को जीआईसी प्लेटफॉर्म पर डिजिटल रूप से चिन्हित एवं मैप किया गया। इस प्रक्रिया के तहत शहर की सार्वजनिक संपत्तियों का विस्तृत डिजिटल डेटा तैयार किया गया, जिससे भविष्य में उनके बेहतर प्रबंधन और निगरानी में मदद मिलेगी।
भारत सरकार की ओर से किए गए मूल्यांकन में रांची नगर निगम की इस पहल को अर्बन गवर्नेंस रिफॉर्म
के अंतर्गत सराहा गया। इसी आधार पर झारखंड राज्य को पांच करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि के लिए पात्र माना गया। यह राशि नगर विकास एवं आवास विभाग, झारखंड सरकार को प्राप्त होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार जीआईसी आधारित एसेट मैपिंग शहरी प्रशासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे नगर निगम को अपनी परिसंपत्तियों की वास्तविक स्थिति, उपयोगिता और रखरखाव से जुड़ी जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। साथ ही इससे राजस्व संग्रहण, योजना निर्माण, अवैध अतिक्रमण की पहचान और शहरी विकास परियोजनाओं की निगरानी में भी सहूलियत मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar