नीट पर राजनीति कर रहा विपक्ष, झारखंड की परीक्षा गड़बड़ियों पर क्यों चुप है कांग्रेस: रघुवर दास
रांची, 25 जुलाई (हि.स.)। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर नीट परीक्षा को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जो दल नीट के मुद्दे पर आंदोलन कर रहे हैं, वही झारखंड में जेपीएससी, जेएसएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं पर पूरी तरह मौन हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को पहले झारखंड के युवाओं के साथ हुए अन्याय पर जवाब देना चाहिए।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में रघुवर दास ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, झामुमो, राजद, आम आदमी पार्टी और वामदल जैसे राजनीतिक दल नीट मामले में घड़ियाली आंसू बहाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्र और युवा यह जानना चाहते हैं कि राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार कौन है।
उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) में सामने आए कथित भ्रष्टाचार और परीक्षा अनियमितताओं पर कांग्रेस की चुप्पी समझ से परे है। उन्होंने सवाल किया कि राहुल गांधी राज्य सरकार से जिम्मेदार लोगों के इस्तीफे की मांग क्यों नहीं कर रहे हैं।
रघुवर दास ने कहा कि विपक्षी दलों को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है, लेकिन उसे समर्थन देने वाली कांग्रेस और वामदल इस पर कोई सवाल नहीं उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन दलों को छात्रों की वास्तव में चिंता है तो उन्हें सरकार से समर्थन वापस लेने का साहस दिखाना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी से झारखंड के युवाओं से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि उन्हें भगवान बिरसा मुंडा की धरती पर आकर उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान जान गंवाने वाले 19 युवाओं को श्रद्धांजलि देनी चाहिए और उनके परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाने की पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो यह माना जाएगा कि विपक्ष को छात्रों की चिंता नहीं, बल्कि केवल राजनीति की चिंता है।
रघुवर दास ने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की ब्लैकलिस्टेड निजी एजेंसी टीडीपीएल को वन टाइम रजिस्ट्रेशन से लेकर अंतिम परिणाम तैयार करने तक आठ महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने दावा किया कि इस एजेंसी को वर्ष 2025 में जेएसएससी द्वारा भी ब्लैकलिस्ट किया गया था। इसके बावजूद उसे जेपीएससी में काम कैसे मिला, इसकी सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार केंद्र सरकार ने नीट यूजी पेपर लीक मामले में तत्काल सीबीआई जांच के आदेश देकर आरोपितों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की, उसी तरह झारखंड सरकार को भी जेपीएससी और जेएसएससी सहित सभी विवादित प्रतियोगी परीक्षाओं की सीबीआई जांच की अनुशंसा करनी चाहिए।
दास ने आरोप लगाया कि झारखंड में एक साथ नौ प्रतियोगी परीक्षाएं स्थगित करने का रिकॉर्ड बना है और पेपर लीक व परीक्षा अनियमितताओं के मामलों में राज्य की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि कई परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रवेश पत्र डाउनलोड करने का लिंक मिला, जबकि संथाली भाषा के प्रश्नपत्र में बड़ी संख्या में पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न पूछे गए। उन्होंने दावा किया कि मीडिया और छात्रों द्वारा कई अनियमितताओं के प्रमाण सामने लाए गए, लेकिन राज्य सरकार दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाने में लगी हुई है।
उन्होंने उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना पर्याप्त तैयारी के आयोजित परीक्षा के दौरान दौड़ में 19 आदिवासी-मूलवासी युवाओं की मौत हुई और सैकड़ों अभ्यर्थी घायल हुए, जो सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रघुवर दास ने कहा कि केंद्र सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून लागू किए हैं, जिनमें दोषियों के लिए 10 वर्ष तक की सजा, 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में त्वरित सुनवाई का प्रावधान किया गया है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है, जबकि झारखंड सरकार परीक्षा गड़बड़ियों पर पर्दा डालकर दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है।
प्रेसवार्ता में भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह और प्रदेश प्रवक्ता अभय सिंह भी मौजूद थे।------------------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे