वनरक्षियों को सर्पदंश और आपात चिकित्सा से निपटने का दिया गया प्रशिक्षण
- रिम्स के चिकित्सकों ने महिलौंग स्थित प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यशाला में 100 से अधिक वनरक्षियों को सिखाए जीवनरक्षक उपाय
रांची, 02 नवंबर (हि.स.)। झारखंड राज्य वनरक्षी प्रशिक्षण संस्थान, महिलौंग में सोमवार को वनरक्षियों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के चिकित्सकों ने प्रशिक्षक के रूप में भाग लिया। कार्यशाला में राज्य के 100 से अधिक वनरक्षियों ने हिस्सा लिया।
विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) शिव प्रिये के नेतृत्व में रिम्स की टीम ने संवादात्मक व्याख्यान और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को आपात स्थितियों से निपटने के तरीके सिखाए। व्याख्यान के दौरान वनरक्षियों को सवाल पूछने और अपनी शंकाओं का समाधान करने का अवसर भी दिया गया।
वन क्षेत्रों में ड्यूटी के दौरान वनरक्षियों को अक्सर वन्यजीवों से जुड़ी आपात स्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. तुषार कुमार ने वन्यजीवों के हमले से होने वाली चोटों की स्थिति में तत्काल उठाए जाने वाले जरूरी कदमों की जानकारी दी।
डॉ. सौरभ सुमन ने सर्पदंश के उपचार और ऐसी स्थिति में समय पर उठाए जाने वाले कदमों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाएं आम हैं। ऐसे मामलों में सही प्राथमिक कदम उठाने के साथ पीड़ित को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना जीवन बचाने के लिए बेहद जरूरी है।
डॉ. मेजर सौरभ कुमार ने प्रतिभागियों को बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि हृदयगति या सांस रुकने जैसी आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता पहुंचने तक बीएलएस के जरिए व्यक्ति की जान बचाने में मदद मिल सकती है। व्यावहारिक सत्र में वनरक्षियों ने पुतलों पर बीएलएस का अभ्यास भी किया।
वनरक्षी अक्सर दूरदराज के वन क्षेत्रों में तैनात रहते हैं, जहां तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध होना मुश्किल होता है। ऐसे में यह प्रशिक्षण उन्हें आपात स्थिति में स्वयं, अपने साथियों और आम लोगों की जान बचाने में मददगार साबित होगा।
कार्यशाला के संचालन में डॉ. मंजुनाथ और डॉ. राहुल साहा ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।-----------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे