रांची में 80.60 लाख की कथित धोखाधड़ी और जालसाजी में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी

 


रांची, 13 सितंबर (हि.स.)। राजधानी रांची के कोतवाली थाना क्षेत्र में 80.60 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला सामने आया है। डॉ. दिवेश कुमार भगत के लिखित आवेदन पर पुलिस ने निखिल कुमार, उसकी पत्नी बबीता गुप्ता सहित छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(2), 318(4) और 61(2) के तहत कार्रवाई की गई है।

प्राथमिकी के अनुसार, डॉ. दिवेश कुमार भगत ने आरोप लगाया है कि उनके रिश्तेदार निखिल कुमार और उसकी पत्नी बबीता गुप्ता ने व्यवसाय बढ़ाने के नाम पर उनसे और उनकी पत्नी शालिनी भगत से आर्थिक सहयोग मांगा था। पारिवारिक संबंधों पर भरोसा करते हुए उन्होंने बबीता गुप्ता के फर्म और संबंधित लोगों को कुल 41 लाख 60 हजार रुपये दिए।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसमें 30 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों से आयुष इंटरप्राइजेज के खाते में भेजे गए, जबकि 11 लाख 60 हजार रुपये अलग-अलग तारीखों में नकद दिए गए। आरोप है कि रकम वापस मांगने पर आरोपित पक्ष लगातार टालमटोल करता रहा। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि रुपये लौटाने के बजाय उन्हें कथित तौर पर धमकी दी गई और पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों का भय दिखाकर मुकदमे में फंसाने की बात कही गई।

शिकायत में हजारीबाग स्थित न्यू होम्स के टोप्पीदी केशव टावर से जुड़ा एक अन्य मामला भी दर्ज कराया गया है। प्राथमिकी के अनुसार, निखिल कुमार, जिसे एमएम न्यू होम का संचालक बताया गया है, ने फ्लैट-भवन निर्माण के नाम पर शिकायतकर्ता से 39 लाख रुपये लिए थे।

आरोप है कि इसके बदले ग्राउंड फ्लोर पर 2600 वर्गफीट व्यावसायिक जगह, दूसरे तल पर 1540 वर्गफीट आवासीय जगह और पार्किंग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। प्राथमिकी में पार्किंग संख्या 01, 05, 06 और 07 का उल्लेख है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रोजेक्ट में अड़चन का हवाला देकर लंबे समय तक उन्हें टालते रहे और वादा पूरा नहीं किया गया।

मामले में जालसाजी का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्हें 21 जनवरी 2014 की तारीख वाला एक कथित फर्जी अलॉटमेंट लेटर दिया गया था। इसके बाद निखिल कुमार ने अन्य आरोपितों के साथ मिलकर पावर ऑफ अटॉर्नी और दूसरे दस्तावेजों के माध्यम से संपत्ति से संबंधित लेनदेन किए।

प्राथमिकी में गोपाल प्रसाद गुप्ता, पदम लाल गुप्ता, रेनू गुप्ता और संजीत कुमार सिंह को भी सह-आरोपित बनाया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों और आवंटन की प्रक्रिया में भी अनियमितता की गई।

शिकायतकर्ता ने 11 अप्रैल 2023 को किए गए एक एग्रीमेंट का भी उल्लेख किया है। आरोप है कि पूर्व में हुए समझौते और इकरारनामा के बावजूद बाद में संपत्ति को लेकर अलग व्यवस्था की गई तथा उन्हें फ्लैट और अन्य संपत्ति देने का आश्वासन दिया गया। प्राथमिकी में दस्तावेजों और संपत्ति के आवंटन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

मामला दर्ज होने के बाद कोतवाली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। सब-इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार राय को मामले का अनुसंधान अधिकारी बनाया गया है।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे