पर्युषण के पांचवें दिन अहिंसा दिवस के रूप में मनाया गया
रांची, 12 सितंबर (हि.स.)। पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन शनिवार को अहिंसा दिवस के रूप में मनाया गया। श्री साधुमार्गी जैन संघ की ओर से आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में स्वाध्यायी पुष्पा ओस्तवाल और ज्योति ओस्तवाल ने प्रवचन दिया।
पुष्पा ओस्तवाल ने अहिंसा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में होने वाली छोटी-छोटी हिंसा से बचने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अहिंसा केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। मन, वचन और कर्म से किसी के प्रति हिंसक भाव नहीं रखना ही अहिंसा का वास्तविक स्वरूप है।
उन्होंने अर्जुन माली की कथा के माध्यम से अन्याय के विरोध और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। वहीं चंडकौशिक सर्प के प्रसंग के माध्यम से भगवान महावीर की करुणा और अहिंसा की शक्ति को बताया। उन्होंने कहा कि धर्म को केवल सुनने या मानने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे जीवन के आचरण में उतारना जरूरी है।
कार्यक्रम में सुदर्शन श्रावक की कथा के माध्यम से श्रद्धा, संयम और धर्मनिष्ठा का संदेश दिया गया। भगवान महावीर के बताए आगार और अनागार धर्म की चर्चा करते हुए कहा गया कि गृहस्थों के लिए आगार धर्म दैनिक जीवन में संयम और अहिंसा का पालन करने की प्रेरणा देता है, जबकि साधु-साध्वियों के लिए अनागार धर्म पूर्ण त्याग और संयम का मार्ग है।
वक्ताओं ने कहा कि पर्युषण महापर्व आत्मचिंतन के माध्यम से जीवन को अधिक संयमित, करुणामय और अहिंसक बनाने की प्रेरणा देता है। इस दौरान अनेक श्रद्धालु तप-साधना में भी रत हैं। विशाल दसानी, खुशबू दसानी, पूजा बोहरा, पायल कोठारी और ममता पिंचा सहित अन्य तपस्वियों के तप की उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने अनुमोदना की और उनके आत्मकल्याण की मंगलकामना की।
कार्यक्रम में राजेश पींचा, अशोक सुराणा, कोमल गेलड़ा, प्रकाश नहाटा, जय पींचा, सुमन बच्छावत और करुणा चोरड़िया सहित अनेक गणमान्य सदस्य तथा सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak