आस्था और परंपरा का संगम बाबा धर्मराज का वार्षिक पूजनोत्सव

 




देवघर, 30 अप्रैल (हि.स.)। जिले के करौं प्रखंड मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक और पौराणिक कर्ण की नगरी करौं में श्रद्धा, भक्ति और कठिन तपस्या का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। बाबा धर्मराज का दो दिवसीय वार्षिक पूजनोत्सव गुरुवार से पूरे विधि-विधान और हर्षोल्लास के साथ शुरू हो गया। जय बाबा धर्मराज और जय बाबा राज राजेश्वर के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है।

मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस वर्ष पूजनोत्सव में कुल 410 भोक्ता शामिल हुए हैं, जिनमें 72 महिला श्रद्धालु भी शामिल हैं। अनुष्ठान की शुरुआत क्षौर कर्म (मुंडन) और उत्तरायणी धारण के साथ हुई। पारंपरिक वेशभूषा में सजे भोक्तागण मंदिर प्रांगण में एकत्र होकर पूजा-अर्चना में जुट गए। पूजनोत्सव के पहले दिन छोटा भोगता के तहत श्रद्धालुओं ने कठोर तप और साधना का पालन किया। कर्णेश्वर मंदिर से धर्मराज मंदिर तक लगभग एक किलोमीटर की दूरी दंडवत प्रणाम करते हुए तय की गई। भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धा का उत्साह कम नहीं हुआ—रास्तों में बालू बिछाई गई, पानी का छिड़काव किया गया और परिजन ताड़ के पंखों से भोक्ताओं को राहत देते नजर आए।

दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद श्रद्धालुओं ने रात्रि में फलाहार ग्रहण किया। पूजनोत्सव के दूसरे दिन बड़ा भोगता का आयोजन होगा, जो अपनी कठोर और अद्भुत परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। महिला भोक्ता सिर पर अग्नि कलश लेकर मंदिर पहुंचेंगी, वहीं पुरुष भोक्ता कांटों पर लेटकर और जलते अंगारों पर चलकर अपनी आस्था और तपस्या का परिचय देंगे। इसके साथ ही पारंपरिक चड़क पूजा का आयोजन भी होगा, जिसमें मुख्य भोक्ता ऊंचे खंभे पर झूलते हुए श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा करेंगे।

मान्यता है कि यह पुष्प घर में रखने से सुख-समृद्धि और शांति आती है। मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया है। मेले में सजी दुकानों और उमड़ी भीड़ ने उत्सव को और भी जीवंत बना दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Anup Kumar Roy