आदिवासी संस्कृति, परंपरा एवं कला संरक्षण के साथ समुदाय का समेकित विकास जरूरी: डीसी

 










रामगढ़, 09 अगस्त (हि.स.)। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को टाउन हॉल, रामगढ़ में जिला प्रशासन द्वारा जिला स्तरीय आदिवासी महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जिले की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा, कला एवं विरासत को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आदिवासी समुदाय के समेकित विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को गति प्रदान करना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक ममता देवी उपस्थित रहीं। वहीं डीसी ऋतुराज, डीएफओ नीतीश कुमार, डीडीसी आशीष अग्रवाल, सांसद प्रतिनिधि राजीव जायसवाल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

अतिथियों द्वारा भगवान बिरसा मुंडा, अमर शहीद सिदो मुर्मू, कान्हू मुर्मू, फूलों मुर्मू, झानो मुर्मू, चांद मुर्मू, भैरव मुर्मू के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद डीडीसी आशीष अग्रवाल द्वारा स्वागत भाषण दिया गया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला तथा जिले में आदिवासी समुदाय के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक ममता देवी ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, भाषा, कला एवं जीवनशैली हमारी समृद्ध विरासत का अभिन्न हिस्सा है। आदिवासी समाज ने प्रकृति एवं पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में सदियों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के विकास के साथ-साथ उनकी विशिष्ट पहचान एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने जिले में आदिवासी समुदाय के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने तथा युवाओं को कौशल एवं रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी विशेष प्रयास करने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम के दौरान रामगढ़ जिला अंतर्गत पीवीटीजी एवं अनुसूचित जनजाति के समेकित विकास हेतु चयनित 34 गांवों के लिए प्रोजेक्ट समर्थ का शुभारंभ किया गया।

प्रोजेक्ट समर्थ के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से पीवीटीजी समूह एवं अनुसूचित जनजाति समूह के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास की दिशा में कार्य किया जाएगा। परियोजना के माध्यम से संबंधित गांवों में उपलब्ध संसाधनों, आवश्यकताओं एवं चुनौतियों का आकलन करते हुए विभिन्न विभागों की योजनाओं का प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

डीसी ऋतुराज ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं एवं अधिकारों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि रामगढ़ जिले की पहचान यहां की विविधतापूर्ण आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं से भी जुड़ी हुई है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आजीविका एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ उपलब्ध कराया जाए।

डीसी ने प्रोजेक्ट समर्थ के शुभारंभ को महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि चयनित 34 गांवों में योजनाओं के अभिसरण एवं चरणबद्ध कार्ययोजना के माध्यम से पीवीटीजी एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के समेकित विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे।

उन्होंने आदिवासी संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं एवं बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ना आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

जिला स्तरीय आदिवासी महोत्सव के दौरान आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं को केंद्र में रखते हुए विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम परिसर में आदिवासी संस्कृति पर आधारित फूड स्टॉल, पेंटिंग, रंगोली एवं रील मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश