चुट्टुपालू घाटी में बना एस्केप लेन, दुर्घटना से बची ब्रेक फेल हुई गाड़ी
रामगढ़, 23 जुलाई (हि.स.)। रामगढ़-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग-33 पर चुट्टुपालू घाटी, मौत की घाटी के रूप से प्रसिद्ध है। लेकिन जिला प्रशासन और एनएचएआई की पहल से घाटी की सूरत बदलने लगी। डीसी ऋतुराज और एसपी मुकेश कुमार लुनायत ने घाटी में हो रही लगातार दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जब पहल शुरू की, तो एनएचएआई ने भी कमर कस ली। नतीजा यह हुआ कि मात्र 15 दिनों के अंदर इस घाटी में एस्केप लेन बनकर तैयार किया गया। इस एस्केप लेन की वजह से घाटी में ब्रेक फेल होने की वजह से मौत का तांडव करने वाली गाड़ियां अब दुर्घटनाग्रस्त होने से भी बच रही हैं। गुरुवार को एक ऐसी ही गाड़ी एस्केप लेन में घुसी। इससे किसी भी प्रकार के जान माल की क्षति नहीं हुई।
चुट्टुपालू घाटी में लगे स्पीडोमीटर और सीसीटीवी कैमरे में सारी चीजें स्पष्ट दिखाई दे रही हैं कि कौन सी गाड़ी कितने स्पीड में चल रही है और किस गाड़ी का ब्रेक फेल होने की वजह से उसका संतुलन खत्म हो गया। गुरुवार को सीसीटीवी कैमरे में घाटी का एक अनोखा दृश्य कैद हुआ। ब्रेक फेल होने की वजह से एक ट्रेलर घाटी में अनियंत्रित हो गया और उसका ड्राइवर उस गाड़ी को रोकने में सफल नहीं हो पा रहा था। लेकिन जब उसकी नजर गड़के मोड़ के पास एस्केप लेन पर पड़ी तो उसने अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल किया। उसने ब्रेक फेल गाड़ी को एस्केप लेन में घुसा दिया। जहां मौजूद बालू में गाड़ी फंस गई और किसी भी प्रकार की जान माल की क्षति नहीं हुई। एस्केप लेन ने न सिर्फ ड्राइवर की जान बचाई, बल्कि उसकी सारी संपत्ति भी सही सलामत बच गई। ऐसा पहली बार था जब घाटी में यह नजारा आम नागरिकों और पुलिस अधिकारियों ने भी देखा। इसकी जानकारी रामगढ़ थाना प्रभारी नवीन प्रकाश पांडे, यातायात थाना प्रभारी गजेंद्र पांडे और एनएचएआई के अधिकारियों ने सभी को दी।
घाटी में लगातार हो रही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने एनएचएआई के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। एनएचएआई के अधिकारियों ने जिस नीति का इस्तेमाल किया अब वह काम कर रही है। इससे पहले जितने भी प्रयास किए गए उससे घाटी में दुर्घटनाओं की संख्या में कमी नहीं आ पाई थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश