नगरा स्टेट के पूर्वजों ने स्थापित की थी मां की पिंडी, 327 वर्षों से जारी है पूजा

 


देवघर, 15 अक्टूबर (हि.स.)। सारठ प्रखंड के कुकराहा पंचायत अंतर्गत तालझारी गांव स्थित मां दुर्गा का भव्य मंदिर आस्था, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां करीब 327 वर्षों से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जा रही है। नगरा स्टेट के वंशजों की ओर से संचालित इस मंदिर में आज भी पुरखों की परंपरा के अनुसार तांत्रिक विधि से मां भगवती के पिंडी स्वरूप की पूजा होती है। महानवमी के दिन यहां विशेष अनुष्ठान के साथ सैकड़ों बकरों और दर्जनों भैंसों की बलि दी जाती है। इस दौरान आसपास के गांवों से हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर की विशेषता यह है कि यह 22 गांवों के लोगों की कुलदेवी के रूप में पूजित है। यहां दर्जनों आदिवासी परिवार भी अपनी वार्षिक पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है, जबकि अष्टमी और महानवमी को श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है।

नगरा स्टेट परिवार के वंशज संजीव कुमार सिंह के अनुसार, उनके पूर्वज 17वीं शताब्दी से पहले महाराष्ट्र में रहते थे। बाद में वे मराठा सम्राट के साथ कोलकाता आए और सिराजुद्दौला के शासनकाल में नगरा में आकर बस गए। परिवार की मान्यता के अनुसार, उनके पूर्वजों को स्वप्न में मां दुर्गा ने पिंडी स्थापित कर पूजा-अर्चना करने का निर्देश दिया था। इसके बाद अजय नदी के किनारे मां की पिंडी स्थापित कर पूजा शुरू की गई, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी जारी है।

वर्ष 2016 में मंदिर से जुड़े सदस्यों और आसपास के श्रद्धालुओं के सहयोग से महाराष्ट्र के कुशल कारीगरों ने भव्य एवं आकर्षक मंदिर का निर्माण किया। इसके बाद से यहां पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जा रही है। मंदिर में सालों भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन शारदीय नवरात्र में विशेष रौनक देखने को मिलती है।

मंदिर के पुजारी धीरेंद्र तिवारी, विष्णुकांत तिवारी और ग्रामीणों के अनुसार, तालझारी वाली मां के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। उनका दावा है कि रात में मंदिर का दरवाजा स्वतः खुलने और पायल के घुंघरुओं की आवाज सुनाई देने जैसी घटनाएं आज भी होती हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद मां भगवती की कृपा से पूरी होती है।

तालझारी मंदिर क्षेत्र के कई गांवों के लिए धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। तालझारी, नोनियाटांड़, शहरजोरी, नगरा, मनिगढ़ी, नकटी, महापुर और कर्मा सहित कुल 22 गांवों के लोग मां दुर्गा को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं। महानवमी पर यहां होने वाली वार्षिक पूजा में आसपास के ग्रामीणों के साथ दर्जनों आदिवासी परिवार भी परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार शामिल होते हैं। इस तरह तालझारी का दुर्गा मंदिर पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं और सामुदायिक आस्था को सहेजे हुए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / Anup Kumar Roy