झारखंड में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा नया आयाम : बर्नवाल
रांची, 15 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ सुनील कुमार बर्नवाल ने कहा कि बेहतर उपचार के लिए सटीक इलाज जरूरी है, जो तभी संभव है जब मरीज का पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध हो। डाटा इज द की फॉर बेटर क्योलर एंड ट्रीटमेंट के तहत आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के माध्यम से स्वास्थ्य रिकॉर्ड को जोड़कर एक सशक्त और पारदर्शी हेल्थ सिस्टम तैयार किया जा रहा है, इसपर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सभी अस्पताल एबीडीएम प्लेजटफॉर्म से जुडें। इससे झारखंड को निश्चित तौर पर डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को नया आयाम मिलेगा।
बर्नवाल बुधवार को एबीडीएम के अंतर्गत एबी-पीएम-जय और मेसी अस्पतालों के लिए एबीडीएम इंटीग्रेशन विषय पर चाणक्य बीएनआर होटल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
इस दौरान केंद्र और राज्य के बीच बीएसएनएल और सीडैक के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया। साथ ही झारखंड में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए ई सुश्रुत झारखंड मोबाईल एप, एबीडीएम झारखंड की आधिकारिक बेबसाईट, बीएसएनएल डिजीटल सेतू एप का शुभारंभ किया गया। बर्नवाल ने कहा कि भविष्य में एबीडीएम एनाब्ल्ड एप एचएमआईएस का उपयोग करने वाले अस्पतालों को ही प्राथमिकता के आधार पर पैनल में शामिल किया जाएगा। एनएचसीएक्से इंटीग्रेशन भी अनिवार्य होगा। ऐसे में अस्पतालों से अपील किया कि वे एबीडीएम एनाब्ल्ड एप एचएमआईएसको अपनाएं। मरीजों को भी डिजिटल रिकॉर्ड और उसके लाभों के प्रति जागरूक करें। बर्नवाल ने बताया कि वर्तमान में देशभर में 96 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड लिंक किए जा चुके हैं। 87 करोड़ से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुका है। इस प्रकार के आयोजन डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम में मौजूद अंतराल को कम
किया जा सकता है।
मौके पर निदेशक छवि रंजन ने कहा कि राज्य में 66 लाख लोगो को आयुष्मान कार्ड का लाभ मिल रहा है। राज्य में एक करोड़ तीस लाख केवाईसी बनाया गया है।
वहीं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड में एबीडीएम की शुरुआत वर्ष 2024 में की गई थी। उस समय राज्य में डिजिटल हेल्थ की परिकल्पना भी चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि जमीनी स्तर पर डॉक्टर, दवाओं और आधारभूत सुविधाओं की कमी जैसी कई समस्याएं मौजूद थीं। चुनौतियों को स्वीकार किया गया और मात्र दो वर्षों में झारखंड डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2024 में 299 करोड़ रुपये की लागत से पांच वर्षों की विस्तृत योजना के साथ इस पहल को प्रारंभ किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने करने के लिए बीएसएनएल के सहयोग से डिजिटल सेवाओं का विस्तार किया गया। राज्य के सभी जिला अस्पतालों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एचएमआईएस का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन हो चुका है। निजी अस्पतालों को भी जल्द इस प्लेटफॉर्म से जोड़ने के प्रयास जारी है।
उन्होंने बताया कि टेली-आईसीयू पहल के तहत रिम्स, रांची को केंद्र बनाकर वर्तमान में चार जिला अस्पतालों में 10-10 बेड के साथ सेवाएं संचालित हो रही हैं। एबीडीएम की सुविधा का भी विस्तार जल्द ही सभी 24 जिलों में किया जाएगा।
कार्यक्रम में राज्य मिशन निदेशक एबीडीएम विद्यानंद पंकज शर्मा, एनएचए के निदेशक डॉ पंकज कुमार अरोरा, ड्रग निदेशक ऋतु सहाय, जिलों के सिविल सर्जन, डीपीएम, डीडीएम, एबीडीएम कर्मी, आयुष्मान भारत के कर्मी, प्राइवेट हॉस्पिटल के डॉक्टर मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar