जनजातीय भाषा विभागों में शिक्षक पद सृजन की मांग, कुलपति को सौंपा ज्ञापन

 


रांची, 07 मई (हि.स.)। आदिवासी छात्र संघ के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी युनिवर्सिटी (डीएसपीएमयू) अध्यक्ष विवेक तिर्की के नेतृत्व में गुरुवार को छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने डीएसपीएमयू के कुलपति प्रो. डॉ. राजीव मनोहर को ज्ञापन सौंपकर कुड़ूख और नागपुरी भाषा विभाग में यूजीसी गाइडलाइन के तहत शिक्षक पद सृजित करने की मांग की।

विवेक तिर्की ने कहा कि जनजातीय भाषाओं के साथ लंबे समय से उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया जा रहा है, जिस पर विश्वविद्यालय प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए। विभाग जनजातीय भाषाओं के विभागों में पद सृजन करें। उन्होंने कहा कि कुड़ूख झारखंड की प्रमुख जनजातीय भाषाओं में शामिल है। इसे पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद स्थायी शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई, शोध कार्य और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। विवेक ने कहा कि कुड़ूख, मुण्डारी और नागपुरी भाषा की स्नातक स्तर की पढ़ाई वर्ष 1985 में तत्कालीन रांची कॉलेज, वर्तमान डीएसपीएमयू में शुरू हुई थी। इसके बाद वर्ष 2018 में कुड़ूख भाषा विभाग को मान्यता मिली, लेकिन अब तक विभाग में शिक्षकों के पर्याप्त पद सृजित नहीं किए गए हैं। उन्होंने यूजीसी गाइडलाइन के अनुसार यूजी और पीजी स्तर को मिलाकर कुड़ूख भाषा विभाग में कम-से-कम सात शिक्षकों के पद शीघ्र स्वीकृत करने की मांग की। विवेक तिर्की ने कहा कि यदि दो दिनों के भीतर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आदिवासी छात्र संघ आंदोलन करने को बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि झारखंड की मूल भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण के लिए जनजातीय भाषा विभागों को समान सम्मान और संसाधन मिलना जरूरी है। कुलपति प्रो. डॉ. राजीव मनोहर ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए शीघ्र उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar