न्यायालय के जेएसएससी सीजीएल रद्द करने पर स्टे लगने से सफल अभ्यर्थियों में खुशी की लहर

 


रांची, 21 अगस्त (हि.स.)।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से बीते दिनों राज्य में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक योग्यताधारी स्तर (सीजीएल) परीक्षा रद्द किए जाने के मामले के बाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सफल अभ्यर्थियों को मामले पर न्यायालय से राहत दी है। न्यायालय ने रद्द हुए परीक्षाओं में स्टे लगने के साथ ही सफल अभ्यर्थियों में खुशी की लहर है। सरकार की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने के बाद सफल अभ्यर्थियों के बीच भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।

चार दिनों से वे प्रोजेक्ट भवन के बाहर सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे थे। न्यायालय के फैसले के आने के बाद प्रोजेक्ट भवन के बाहर अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है। इस दौरान प्रोजेक्ट भवन के पास जश्न का माहौल दिखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि वे कल भी अधिकारी पदाधिकारी थे आज भी हैं। न्यायालय से उन्हें पूरी उम्मीदें थीं। लेकिन वे चाहते थे सरकार सीबीआई जांच कराकर भ्रष्टाचार की पोल खोले, ताकि पता चल सके कि वास्तव में सीजीएल परीक्षाओं में गडबडी हुई है।

सफल अभ्यर्थियों ने कहा कि मामले में पता चले कि कौन दोषी है और इसमें किसने कितनी घूस देकर नौकरी पाई है।

पुनम बारला, रश्मि कुमारी, उज्वल सहित अन्य कई सफल अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा में सफलता हासिल की थी। परीक्षा रद्द होने के बाद उनके सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई थी। पिछले कुछ दिनों से वे लगातार असमंजस में थे। अब न्यायालय के फैसले से आगे की राह कुछ हद तक साफ हुई है और उन्हें राहत मिली है।

उन्होंने कहा कि परीक्षा की तैयारी को लेकर उनके परिवारों की उम्मीदें भी जुड़ी थीं। अभिभावकों ने उनकी पढ़ाई और कोचिंग पर सालों तक रूपए खर्च किए थे। परीक्षा विवाद में फंसने के बाद परिवार भी मानसिक तनाव में थे। अभ्यर्थियों ने कहा कि अपने अधिकारों को लेकर वे आगे की लड़ाई भी जारी रखेंगे। न्यायालय के फैसले से उन्हें नई ऊर्जा मिली है और वे अपनी मांगों को लेकर एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar