रांची के निजी अस्पताल में युवक की मौत पर बवाल, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश
रांची, 04 जुलाई (हि.स.)। राजधानी रांची के निजी राज अस्पताल में इलाज के दौरान 18 वर्षीय युवक की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन पर चिकित्सकीय लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। मृतक के परिजनों का आरोप है कि पैर के फ्रैक्चर के इलाज के लिए भर्ती कराए गए युवक की उपचार में लापरवाही के कारण मौत हुई। साथ ही, मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा 22 लाख रुपये का बिल थमाए जाने के आरोप ने मामले को और तूल दे दिया है। घटना पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
दरअसल, लातेहार जिले के निवासी 18 वर्षीय राजू कुमार रंजन 24 मई को सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। दुर्घटना में उनके पैर में फ्रैक्चर हुआ था, जिसके इलाज के लिए उन्हें रांची स्थित राज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने आवश्यक चिकित्सकीय सावधानियां नहीं बरतीं। उनका कहना है कि दो से तीन दिनों तक घाव की नियमित ड्रेसिंग नहीं की गई, जिससे संक्रमण तेजी से फैल गया और उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
परिजनों के अनुसार, संक्रमण गंभीर होने के बाद राजू को अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उनका आरोप है कि यदि समय पर समुचित इलाज और देखभाल की जाती तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि जब चोट केवल पैर में थी, तो संक्रमण इतना गंभीर कैसे हो गया कि मरीज की मृत्यु हो गई।
मृत्यु के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा 22 लाख रुपये का बिल जमा करने के लिए कहे जाने से परिजन आक्रोशित हो गए। उन्होंने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन करते हुए डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही के आरोप लगाए। परिजनों के आग्रह पर राजू के शव का पोस्टमार्टम राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में कराया गया।
मामले की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर संज्ञान लेते हुए रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री को पूरे प्रकरण की गहन एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिला प्रशासन तत्काल सक्रिय हो गया। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने सिविल सर्जन को जांच का दायित्व सौंपते हुए पूरे मामले की जांच के लिए जिला स्तरीय विशेष जांच टीम का गठन किया है। यह टीम अस्पताल के उपचार संबंधी रिकॉर्ड, चिकित्सकीय प्रक्रिया, मेडिकल दस्तावेजों तथा अन्य संबंधित पहलुओं की जांच कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगी।
इधर, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार को उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने का निर्देश दिया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यदि जांच में अस्पताल प्रबंधन अथवा संबंधित चिकित्सक दोषी पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा, सम्मान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा चिकित्सा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग आगे की कार्रवाई करेंगे। वहीं, समाचार लिखे जाने तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे