किस राज्य में हमारे कितने श्रमिक काम कर रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी दें 03 माह में : मुख्यमंत्री

 




रांची, 04 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने गुरुवार को झारखंड मंत्रालय में श्रम विभाग और योजना एवं विकास विभाग की समीक्षा को लेकर अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।

बैठक में मुख्यमंत्री ने विभागीय योजनाओं, विभाग की ओर से संचालित रोजगार सृजन कार्यक्रमों एवं गतिविधियों, कौशल विकास प्रशिक्षण, नियोजन सेवाओं, श्रमिक कल्याण तथा विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी संचालन, समयबद्ध कार्यान्वयन और आम जनता तक लाभ पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आधुनिक बनाने, सभी पात्र श्रमिकों को कल्याणकारी योजनाओं का शत प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने पर बल दिया।

उन्होंने राज्य के युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाने का निर्देश दिया। साथ ही प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए विशेष पहल करने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस राज्य में श्रम विभाग की बहुत बड़ी भूमिका है। आपके बेहतर कार्य प्रणाली से ही श्रमिकों का उत्थान किया जा सकेगा। श्रमिकों की सुरक्षा आपके कार्यों और योजनाओं पर निर्भर है। विभाग श्रमिकों तक अपनी पहुंच बनाए। देश के सभी राज्यों में श्रमिकों के लिए एक हेल्पलाइन सेंटर स्थापित करें। बैठक में श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के मंत्री संजय प्रसाद यादव उपस्थित थेे।

मुख्यमंत्री ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ तथा श्रमिक कल्याण कार्यक्रमों की प्रगति पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़े और योजना का लाभ समय सीमा के अंतर्गत देना सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राज्य में असंगठित, निर्माण एवं प्रवासी श्रमिकों का अपडेटेड डाटा शीघ्र तैयार करने का निर्देश अधिकारियों को दिया। मुख्यमंत्री ने अगले 03 माह के भीतर देश के किस राज्य में हमारे कितने श्रमिक क्या काम कर रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी पोर्टल में रहे यह सुनिश्चित किए जाने का निर्देश दिया।

बैठक में मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि झारखंड राज्य प्रवासी सुलभ सहायता योजना के तहत झारखण्ड राज्य के प्रवासी और विदेश में कार्यरत श्रमिकों के लिए नोएडा (उत्तर प्रदेश), हैदराबाद, चेन्नई, बंगलुरु और मुम्बई में प्रवासी सहायता केन्द्र स्थापित किये जायेंगे। इसके अलावा सीमावर्ती राज्यों में प्रवासी श्रमिकों को सहायता प्रदान करेंगे।

मुख्यमंत्री ने श्रमिक निबंधन कार्यों में तेजी लाने का भी निर्देश दिया। श्रमिक की सुरक्षा, ट्रैकिंग विभाग की जिम्मेदारी है। श्रम विभाग कैम्प लगाकर श्रमिकों का पोर्टल के माध्यम से निबंधन कराएं, ताकि उनके साथ कोई समस्या होने पर राज्य सरकार उनकी त्वरित मदद कर सके।

उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना के श्रमिकों का भी निबंधन हो, यह सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने श्रमिकों के लिए सेफ्टी किट, जूता, हेलमेट, ग्लब्स की राशि देने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कंस्ट्रक्शन साइड्स पर श्रमिकों की सुरक्षा से संबंधित सभी जरूरतों को अंकित करने के लिए बोर्ड लगवाना अनिवार्य करें।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि विभाग कुछ ऐसी कार्य योजना बनाएं, जिससे मजदूरों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। झारखंड को श्रमिक बेस्ड राज्य के रूप में बताया जाता है। इससे बाहर निकलने के लिए प्रभावी कदम उठाये जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जरूरतें बदल चुकी हैं। विभाग कुछ ऐसी नीति बनाएं, जिससे श्रमिक अपने पैरों पर खड़े (आत्मनिर्भर) हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि रोज़ी -रोजगार के लिए श्रमिक गांव छोड़ने को भी विवश हो रहे हैं। यह पलायन हर हाल में रुके, इस लक्ष्य के साथ कार्यों को गति दें। उन्होंने कहा कि विभाग एक बेहतर मैकेनिज्म विकसित कर मजदूरों का सत्यापन कराएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की टीम श्रमिक प्वाइंट चिन्हित करे (वैसे चौक चौराहा जहां काम के लिए श्रमिक एकत्र होते हैं)। इस श्रमिक प्वाइंट पर पर जाकर, उनके कल्याण के लिए सरकार की योजनों की जानकारी दें और उन्हें जागरूक करें। चिन्हित श्रमिक पड़ाव स्थान पर शेड बनाएं, ताकि मजदूरों को धूप व बरसात से बचाव हो सके। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि

बीओसीडब्लू बोर्ड की कार्य योजना के तहत श्रमिक पड़ावों को श्रमिक चौक-सह-सुविधा केन्द्र के रूप में विकसित किए जाने की योजना है, जहां सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रवासी मजदूरों का मैपिंग कर उनका लोकेशन पोर्टल में दर्ज करें। हमारे कितने मजदूर देश के बाहर या अन्य राज्यों में कार्य कर रहे हैं। इसका पूरा डाटा रखें। श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग अपनी योजनाओं को विभिन्न संबंधित विभागों से समन्वय बनाकर मूल्यांकन करें।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे