बाल विवाह और डायन प्रथा समाज के लिए गंभीर चुनौती : सांसद

 


दुमका, 16 जनवरी (हि.स.)। समाज कल्याण की महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार को प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन हुआ।

कार्यशाला सामाजिक कुरीति निवारण, राज्य सरकार की योजनाएं एवं बाल विवाह मुक्त झारखंड विषय पर आयोजित हुई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त कुरीतियों विशेषकर बाल विवाह और डायन प्रथा जैसी अमानवीय प्रथाओं के उन्मूलन के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना एवं महिलाओं तथा किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार की ओर से संचालित योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना रहा।

कार्यशाला में बाल विवाह एक संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध है, जिसके लिए कानून में कठोर दंड का प्रावधान है। किसी भी संदिग्ध स्थिति में महिला हेल्पलाइन-181, चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 एवं पुलिस हेल्पलाइन-112 पर तत्काल सूचना देने की अपील की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर सांसद नलिन सोरेन ने कहा कि दोनों कुरीतियां आज भी समाज के लिए गंभीर चुनौती हैं और इनका उन्मूलन हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कम उम्र में बच्चियों की शादी कर दी जाती है। जिससे उनका शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास बाधित होता है।

बच्चियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का करना पड़ता है सामना

उन्‍होंने कहा कि कम उम्र में विवाह होने से बच्चियों को अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिसका प्रभाव उनके पूरे जीवन पर पड़ता है। यह नहीं केवल उनके भविष्य को प्रभावित करता है, बल्कि समाज की प्रगति को भी अवरुद्ध करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि पूरे देश में आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि

यदि निरंतर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, तो बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

इस अवसर पर जामा विधायक डॉ लुईस मरांडी ने कहा कि दैनिक जीवन में आज भी बाल विवाह जैसी कुप्रथाएं देखने को मिलती हैं। सरकार ने इसके विरुद्ध सख्त कानून बनाए हैं, लेकिन उन्हें प्रभावी रूप से लागू करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किशोरी बच्चियों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से परिपक्व होने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। जिससे वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं ले सकें। इसके लिए अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बाल विवाह मुक्त जिला बनाने के लिए समाज, प्रशासन और सरकार के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए सभी से सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर जिप अध्यक्ष जॉयस बेसरा ने भी विचार व्‍यक्‍त किया।

कार्यक्रम में डीडीसी अनिकेत सचान ने भी बाल विवाह जैसे सामाजिक कुरितियां पर चर्चा किया। इस अवसर पर लोगों को बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण की शपथ भी दिलाई गई। इस दौरान बाल विवाह को रोकने के दिशा में कार्य करने वाले हीरामनि टुडू सेविका विजयबांध, बसंती मुर्मू मुखिया,पंचायत-नाचनगढ़िया और कमीशन सोरेन,मुखिया,पंचायत-भूटकोडिया को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में सामाजिक कुरीति निवारण से संबंधित जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / नीरज कुमार