सिमडेगा में नहाय-खाय के साथ लोक आस्था का महापर्व चैती छठ शुरू

 


सिमडेगा, 22 मार्च (हि.स.)। झारखंड के सिमडेगा जिले में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ रविवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। चार दिनों तक चलने वाला यह कठिन व्रत सूर्य उपासना को समर्पित होता है, जिसमें श्रद्धालु कठोर नियमों का पालन करते हुए प्रकृति और भगवान भास्कर की आराधना करते हैं। हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के बीच पड़ने के कारण इस पर्व का विशेष धार्मिक महत्व है।

जिले में इस महापर्व को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। उपायुक्त कंचन सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पावन अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं। उपायुक्त ने स्वयं गेहूं सुखाकर सात्विक भोजन तैयार कर व्रत की शुरुआत की, जो परंपरा और आस्था के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

नहाय-खाय का महत्व

चैती छठ की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती नदी, तालाब या अन्य पवित्र जल स्रोतों में स्नान कर शुद्धता का पालन करते हैं। इसके बाद कद्दू, चना दाल और अरवा चावल से बने सात्विक भोजन का सेवन किया जाता है, जिसे शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

खरना के साथ शुरू होगा निर्जला व्रत

छठ पर्व के दूसरे दिन, 23 मार्च को खरना पूजा की जाएगी। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखकर शाम को पूजा के बाद गुड़ और दूध से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है, जिसे इस पर्व की सबसे कठिन साधना माना जाता है।

सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा

तीसरे दिन 24 मार्च को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे, जबकि चौथे दिन 25 मार्च की सुबह उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा। इसके साथ ही चार दिवसीय महापर्व का समापन होगा।

केलाघाघ डैम में विशेष तैयारियां

इस बीच शहर से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित केलाघाघ डैम परिसर में छठ पर्व को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी यहां सैकड़ों श्रद्धालु भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने पहुंचेंगे। नगर परिषद द्वारा घाटों की साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

चैत्र माह में मनाया जाने वाला यह महापर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है, जो आस्था, शुद्धता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु और आरोग्य की कामना के साथ यह कठिन व्रत करते हैं।------------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे