शिक्षकों को आवश्यकता पड़ने पर ही लगाएं एसआईआर अभियान में : के रवि कुमार
रांची, 01 जुलाई (हि.स.)। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) के रवि कुमार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में निर्वाचन सेवा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या सीमित होने के कारण चुनाव एवं मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे कार्यों में अन्य विभागों के कर्मियों की भी प्रतिनियुक्ति करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का प्राथमिक दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, लेकिन इसके साथ ही प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित करना भी लोकतंत्र की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने बुधवार को बताया कि विभिन्न जिलों से मिली सूचनाओं के आधार पर यह सामने आया है कि स्वयंसेवक के रूप में तैनात कुछ शिक्षकों को शिक्षण कार्य के साथ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में बीएलओ की सहायता करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि शिक्षकों को केवल आवश्यकता पड़ने पर ही इस कार्य में लगाया जाए और उनकी भूमिका सहयोगात्मक रहे।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि क्षेत्रीय दौरों के दौरान यह पाया गया कि कई पात्र नागरिक, विशेषकर प्रवासी मजदूर, आवश्यक पहचान दस्तावेजों के अभाव में अब तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं।
उन्होंने कहा कि मतदाता बनने के लिए भारतीय नागरिक होना, 18 वर्ष की आयु पूरी करना और संबंधित क्षेत्र का सामान्य निवासी होना पर्याप्त है। विशेष परिस्थितियों में सक्षम निर्वाचन पदाधिकारी सुनवाई के बाद भी पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल कर सकते हैं।
उन्होंने स्वयंसेवकों की जिम्मेदारियां भी तय करते हुए कहा कि वे अनमैप्ड मतदाताओं की पहचान करने, पात्र नागरिकों का नामांकन कराने, बीएलओ-बीएलए-2 बैठकों का दस्तावेजीकरण करने, एएसडीडी सूची तैयार कराने, जागरूकता अभियान चलाने और क्षेत्र में आने वाली समस्याओं की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में सहयोग करेंगे। साथ ही उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि स्वयंसेवक किसी भी स्थिति में बीएलओ ऐप पर डेटा एंट्री या तकनीकी संचालन का कार्य नहीं करेंगे।
के रवि कुमार ने कहा कि यदि किसी बीएलओ पर अनुचित दबाव डाला जाता है, तकनीकी कठिनाई आती है या कोई अपात्र व्यक्ति गलत जानकारी देकर मतदाता बनने का प्रयास करता है, तो ऐसे मामलों की तत्काल सूचना एईआरओ, ईआरओ या जिला निर्वाचन पदाधिकारी को दी जाए, ताकि नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे