पर्यावरण संरक्षण के प्रति नौकरशाह बनें अधिक जागरूक : सरयू

 


रांची, 22 अप्रैल (हि.स.)। युगांतर भारती और नेचर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को पुराना विधानसभा के सभागार में विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर अतिथि विधायक सरयू राय ने कहा कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की कार्य संस्कृति आज सवालों के घेरे में है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति आम जनता से अधिक नौकरशाहों एवं मेधावी वर्ग को जागरूक होने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विकास की दिशा चिंताजनक है और शाश्वत विकास की अवधारणा को अपनाना जरूरी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में तकनीक का संतुलित उपयोग जरूरी है, क्योंकि तकनीक एक अच्छा सेवक है, लेकिन खराब मालिक बन सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि अनियंत्रित औद्योगिक गतिविधियों, भूमिगत खनन और अत्यधिक संसाधन दोहन से पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

राय ने कहा कि पृथ्वी का संकट संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि बढ़ते तापमान और असंतुलित विकास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अधिक लाभ की होड़ में शुभ-लाभ की जगह लोभ-लाभ की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिस पर नियंत्रण जरूरी है।

कार्यक्रम में युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण ने बताया कि वर्ष 2047 तक सोलर वेस्ट 11 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जो एक बड़ी चुनौती होगी। डॉ एमके जमुआर ने कहा कि प्राचीन ग्रंथों में पर्यावरण संरक्षण के स्पष्ट निर्देश हैं, जिन्हें अपनाने की जरूरत है। वरिष्ठ पर्यावरणविद् डॉ ओम सिंह ने सरकार और जनता के बीच समन्वय की कमी को पर्यावरण संरक्षण में बाधा बताया।

कार्यक्रम में परिचर्चा सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे। आयोजन का संचालन भारतेंदु झा ने किया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar