राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में सीजीएल परीक्षा के मुद्दे पर दिए विरोधाभासी एफिडेविट : भाजपा
रांची, 21 सितंबर (हि.स.)। झारखंड भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा मामले में सामने आ रहे नए तथ्यों को लेकर हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है।
प्रतुल शाहदेव ने सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि सीजीएल परीक्षा पर सरकार की भूमिका अब खुद सबसे बड़े सवाल के घेरे में है। एक तरफ पहले सीआईडी की जांच के बाद परीक्षा को क्लीन चिट दिए जाने की बात सामने आई, दूसरी तरफ अब उसी मामले की आगे की जांच में सफल अभ्यर्थियों सहित कई लोगों की गिरफ्तारियां हो रही हैं और पेपर लीक के नेटवर्क की परतें खुल रही हैं। उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर सवाल यह है कि अगर पहली जांच सही थी तो आज ये गिरफ्तारियां और नए सबूत कहां से आ रहे हैं। और अगर वर्तमान जांच सही दिशा में है, तो पहले की जांच में क्लीन चिट किस आधार पर दी गई।
प्रतुल ने कहा कि सरकार ने सीआईडी की पहली जांच के आधार पर डेढ़ वर्ष पूर्व सीजीएल परीक्षा को क्लीन चीट दे दी थी और कहा था कि कोई प्रश्न पत्र लीक नहीं हुआ। हास्यास्पद रूप से सीआईडी के अनुसार पहली जांच में 125 में से 115 प्रश्नों के लीक होने की बात सिर्फ गेस पेपर की बात थी।
प्रतुल ने कहा बाद में सीआईडी ने दूसरी बार इसी परीक्षा की निष्पक्षता पर प्रश्न उठाया और कहा कि लाखों में सीटों का सौदा हुआ। सीआईडी की इसी दूसरी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में दूसरी बार विरोधाभाषी एफिडेविट दाखिल किया और कहा कि परीक्षा की पवित्रता नष्ट हुई। प्रतुल ने कहा की सरकार ने उच्च न्यायालय को को भी एक ही मुद्दे में विरोधाभाषी शपथपत्र दाखिल करके गुमराह करने की कोशिश की है तो बहुत संगीन मामला है।
प्रतुल ने कहा कि राज्य सरकार बताएं की सीआईडी के जिन अफसरों ने पहले जांच में सीजीएल परीक्षा को क्लीन चीट दे थी और उच्च न्यायालय में सरकार से गलत एफिडेविट करवा दिया था। क्या सरकार पहली बार गलत जांच करने वाले सीआईडी के अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी। अगर सरकार उन दोषी अफसरों पर कार्रवाई नहीं करती तो कहीं ना कहीं सरकार इस कवर अप ऑपरेशन में शामिल नजर आएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे