हेमंत सरकार बच्चों के हाथों से किताबें और उनके शिक्षा के अधिकार छीन रही है: राफिया नाज़
-भाजपा ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर हेमंत सरकार पर साधा निशाना, 50 हजार शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग
रांची, 28 जून (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज़ ने झारखंड सरकार पर राज्य की शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। रविवार को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार ने बच्चों और युवाओं के भविष्य की अनदेखी की है, जिसके कारण सरकारी विद्यालयों की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है।
राफिया नाज़ ने कहा कि राज्य के कई सरकारी विद्यालयों में बच्चे आज भी जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। समय पर स्कूल ड्रेस उपलब्ध नहीं हो रही है, हजारों विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति लंबित है और 7,500 से अधिक विद्यालय एक ही शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मॉडल कैसे माना जा सकता है।
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि राज्य में 50 हजार से अधिक शिक्षक पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। उन्होंने यू-डायस के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि झारखंड का छात्र-शिक्षक अनुपात राष्ट्रीय औसत से काफी खराब है। कई विद्यालयों में एक ही शिक्षक को पांच कक्षाओं की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे प्रशासनिक कार्यों में लगाए जाने से विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियां और अधिक प्रभावित होंगी। इसके लिए उन्होंने सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया में लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
राफिया नाज़ ने आरोप लगाया कि राज्य के हजारों विद्यालय आज भी पर्याप्त कक्षाओं, फर्नीचर, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने हर वर्ष पांच लाख रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन न शिक्षकों की नियुक्ति हुई, न युवाओं को रोजगार या बेरोजगारी भत्ता मिला और न ही विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई गई।
उन्होंने कहा कि सरकार का रिपोर्ट कार्ड यह दर्शाता है कि बच्चों के पास शिक्षक नहीं हैं, युवाओं के पास रोजगार नहीं है और विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति तक समय पर नहीं मिल रही है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि जब वर्षों से हजारों शिक्षक पद रिक्त थे, तो उन्हें भरने की दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि गरीब, आदिवासी, दलित और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का समान अधिकार मिलना चाहिए।
राफिया नाज़ ने राज्य सरकार से 50 हजार रिक्त शिक्षक पदों पर शीघ्र नियमित नियुक्ति करने की मांग की। उन्होंने लंबित छात्रवृत्तियों का अविलंब भुगतान सुनिश्चित करने, सभी विद्यार्थियों को समय पर स्कूल ड्रेस, पाठ्यपुस्तकें और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की। इसके साथ ही युवाओं से रोजगार और बेरोजगारी भत्ते को लेकर किए गए वादों को जल्द पूरा करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि झारखंड के बच्चों को बहाने नहीं, शिक्षक चाहिए और युवाओं को भाषण नहीं, बल्कि रोजगार चाहिए। राज्य सरकार को शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर गंभीरता के साथ कार्य करना चाहिए।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे