राज्य का खजाना खाली, 11 दिन बाद भी अधिकारियों को नहीं मिला वेतन: प्रतुल
रांची, 11 अप्रैल (हि.स.)। झारखंड में सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने राज्य सरकार पर गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य का खजाना खाली हो चुका है और इसका सीधा असर सरकारी कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में शाहदेव ने कहा कि महीने की 11 तारीख बीत जाने के बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है, जो पिछले 26 वर्षों में पहली बार हुआ है। उनके अनुसार राज्य में करीब 2,35,930 नियमित अधिकारी और कर्मचारी हैं, जबकि संविदा और आउटसोर्स कर्मियों की संख्या लगभग 40 से 45 हजार है। इस तरह करीब 2.75 लाख लोगों को अब तक वेतन नहीं मिल पाया है।
शाहदेव ने बताया कि इन कर्मचारियों पर लगभग 15 लाख लोग आश्रित हैं, जिससे बड़ी संख्या में परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई कर्मचारी राशन खरीदने, बच्चों की फीस भरने और ईएमआई चुकाने में असमर्थ हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने राज्य सरकार से सवाल किया कि क्या वह वेतन भुगतान के लिए हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर कर्ज लेने की योजना बना रही है या किसी वित्तीय एडवांस का इंतजार कर रही है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर हर साल नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में 5 अप्रैल तक वेतन भुगतान हो जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
शाहदेव ने आरोप लगाया कि सरकार 31 मार्च तक बजट के लगभग 22 हजार करोड़ रुपये खर्च नहीं कर सकी, क्योंकि खजाने में धन की कमी थी। साथ ही उन्होंने कहा कि राजस्व वसूली भी निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप नहीं रही, जो वित्तीय प्रबंधन की कमजोर स्थिति को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च को झारखंड को ग्रामीण विकास और पंचायती राज के लिए 2300 करोड़ रुपये तथा नगर विकास के लिए 392 करोड़ रुपये जारी किए थे, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
भाजपा प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार पर प्राथमिकताओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आवास के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिसमें मुख्य भवन की लागत 67 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
शाहदेव ने आरोप लगाया कि सरकार के पास निर्माण कार्यों के लिए धन है, लेकिन कर्मचारियों को वेतन देने के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है और आम जनता को आर्थिक संकट की ओर धकेल रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे