रिम्स प्रबंधन कुव्यवस्था छुपाने के लिए मीडिया के प्रवेश पर रोक लगाना चाहता है: रमाकांत

 


रांची, 03 जून (हि.स.)। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में मीडिया कर्मियों के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्णय को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रेस की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रमाकांत महतो ने बुधवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में रिम्स प्रबंधन और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर इरफान अंसारी पर स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति और प्रशासनिक विफलताओं को छुपाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय पूरी तरह अलोकतांत्रिक, तानाशाहीपूर्ण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।

रमाकांत महतो ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की भूमिका जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाने, व्यवस्था की खामियों को उजागर करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की होती है। ऐसे में मीडिया कर्मियों को अस्पताल परिसर में प्रवेश से रोकना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, रिम्स में व्याप्त अव्यवस्थाओं, मरीजों की समस्याओं और प्रशासनिक कमियों को सार्वजनिक होने से रोकने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि अस्पताल प्रशासन के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो मीडिया की मौजूदगी से परहेज करने का कोई कारण नहीं होना चाहिए।

रमाकांत महतो ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का इतिहास प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने से जुड़ा रहा है। उन्होंने आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि देश पहले भी मीडिया पर प्रतिबंधों का दौर देख चुका है और झारखंड में लिए जा रहे ऐसे फैसले उसी सोच को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया की आवाज को दबाने का कोई भी प्रयास लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है।

भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि दवा खरीद, चिकित्सा उपकरणों की खरीद, एएनएम नियुक्ति, सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति तथा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में मीडिया की निगरानी और स्वतंत्र रिपोर्टिंग पहले से अधिक आवश्यक हो जाती है।

उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख और प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में मीडिया के प्रवेश पर इस प्रकार की रोक का उदाहरण शायद ही देखने को मिलता है। उनका कहना था कि सरकार को आलोचनाओं से बचने या सूचनाओं को नियंत्रित करने के बजाय स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने तथा अस्पताल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

भाजपा प्रवक्ता ने राज्य सरकार से रिम्स में मीडिया प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंधात्मक निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की। साथ ही कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया की भूमिका को कमजोर करने वाले किसी भी कदम से बचना चाहिए और प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।----------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे