आर्सेनिक मुक्त शुद्ध पेयजल बनाने की दिशा में बीआईटी मेसरा का सकारात्मक कदम
रांची, 30 जुलाई (हि.स.)।
बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा ने साहेबगंज जिले के आर्सेनिक प्रभावित नौ सरकारी विद्यालयों में पांच-स्तरीय आर्सेनिक निष्कासन फिल्टर स्थापित कर तीन हजार से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया है। बीआईटी मेसरा के पूर्व छात्र की ओर से स्थापित आशा एंड सज्जन अग्रवाल फाउंडेशन के सहयोग से की गई इस पहल से राज्यभर में आर्सेनिक युक्त लाल पानी से कार्बोनेट तत्व पूरी तरह से खत्म हो सकती है। कई जगहों में पानी साफ किए जा रहे हैं। बीआईटी मेसरा की ओर से गुरूवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से यह जानकारी दी गई।
इस परियोजना का नेतृत्व इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड प्लानिंग के एसोसिएट डीन डॉ. कीर्ति अभिषेक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग के डॉ. विशाल एच. शाह तथा शोधार्थी आकाश ने किया। टीम ने फिल्टर स्थापना के बाद पानी की गुणवत्ता की जांच कर इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि भी की है।
डॉ. कीर्ति अभिषेक ने बताया कि वर्षों से साहेबगंज के कई विद्यालयों में मटमैला और आर्सेनिक युक्त पानी विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ था। नई फिल्ट्रेशन प्रणाली स्थापित होने के बाद राजकीय मध्य विद्यालय फुदकीपुर, स्वामी विवेकानंद उच्च विद्यालय श्रीधर, यूएमएस सरपंच टोला, एमएस किशन प्रसाद, यूपीजी राजकीय मध्य विद्यालय समदा, यूपीजी पीएस शांतिनगर घोघी, यूएचएस श्रीरामचौकी, पीएम श्री नगरपालिका कन्या विद्यालय तथा एक सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में अब स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। बीआईटी मेसरा की ओर से भी कहा गया है कि यह पहल तकनीकी विशेषज्ञता के माध्यम से झारखंड की जमीनी समस्याओं के समाधान और सामाजिक दायित्व निभाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यूएचएस श्रीरामचौकी की शिक्षिका अनिता कुमारी ने बताया कि फिल्टर लगने के बाद पानी की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और सभी विद्यार्थी इसका उपयोग कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar