झारखंड में अबतक नहीं बन सका बांग्ला अकादमी : अरूप
रांची, 16 मार्च (हि.स.)। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक अरूप चटर्जी ने सोमवार को दूसरी पाली में भू राजस्व विभाग, मंत्रिमंडल सचिवालय, कार्मिक राजभाषा विभाग सहित अन्य विभागों के अनुदान मांगों पर कटौती प्रस्ताव के विरोध में कई मुद्दों को उठाया।
उन्होंने बांग्ला भाषा की उपेक्षा, विकास कार्यों में फंड के उपयोग और झारखंड आंदोलन के नेताओं के सम्मान से जुड़े विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि एकीकृत बिहार के समय से बंगाल अकादमी कार्यरत थी, लेकिन झारखंड राज्य बनने के वर्षों बाद भी यहां बांग्ला अकादमी का गठन नहीं किया गया है जाे विडंबना है। उन्होंने कहा कि झारखंड में बड़ी संख्या में लोग बांग्ला भाषा बोलते हैं। जमशेदपुर, संथाल परगना और छोटानागपुर क्षेत्र में बांग्ला का व्यापक उपयोग होता है। कई इलाकों में कुर्मी और संताली समुदाय के लोग भी बांग्ला भाषा का प्रयोग करते हैं। अरूप चटर्जी ने स्कूलों में बांग्ला भाषा की किताबों की कमी और बांग्ला शिक्षकों की बहाली नहीं होने का मुद्दा भी उठाया और सरकार से इस दिशा में जल्द कदम उठाने की मांग की। उन्होंने योजना एवं विकास विभाग के अनटाइड फंड के उपयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नए नियमों के कारण कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। साथ ही सरकारी जमीनों पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए अदालत के साथ समन्वय बनाकर जमीन वापस लेने की दिशा में कार्रवाई करने की मांग की।
विधायक ने झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता एके राय का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके निधन के बाद अबतक उनकी प्रतिमा स्थापित नहीं की गई और न ही किसी संस्थान का नाम उनके नाम पर रखा गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar